मनरेगा मजदूरों का प्रदर्शन: बजट बढ़ाने और काम की मांग
मनरेगा का बजट बढ़ाने की मांग
- मनरेगा का बजट बढ़ाने, 200 दिन काम, 800 रुपये मजदूरी देने की मांग
जींद। मनरेगा संघर्ष मोर्चा द्वारा आयोजित एक प्रदर्शन में मनरेगा मजदूरों ने शुक्रवार को योजना की बहाली की मांग को लेकर आवाज उठाई। उन्होंने सरपंच प्रतिनिधि संदीप पूनिया को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन से पहले, मजदूर और अन्य ग्रामीण गांव अहिरका के अंबेडकर भवन में एकत्रित हुए और रोष सभा का आयोजन किया। सीटू के जिला उपाध्यक्ष कपूर सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले 12 वर्षों में गरीबों को और गरीब बनाया है।
उन्होंने बताया कि मनरेगा जैसे रोजगार देने वाले कानून ने ग्रामीण क्षेत्रों में कई विकास कार्य किए हैं, जैसे गांव के रास्तों की मरम्मत और तालाबों की खुदाई। लेकिन भाजपा सरकार ने इस योजना के बजट में कटौती की है।
मजदूरों ने मांग की कि मनरेगा का बजट बढ़ाया जाए, 200 दिन काम दिया जाए, और 800 रुपये मजदूरी दी जाए। इसके अलावा, काम करते समय मजदूर की मृत्यु पर 10 लाख रुपये मुआवजा और मेट को कुशल वर्कर का दर्जा दिया जाए।
40 वर्ष पहले गरीबों के प्लाटों का मालिकाना हक
इस योजना के तहत राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ा दिया गया है और ग्राम सभाओं के अधिकारों को समाप्त कर दिया गया है। इसलिए, देशभर के मनरेगा मजदूर हड़ताल पर हैं। उन्होंने मांग की कि मनरेगा के तहत 200 दिन काम और 800 रुपये मजदूरी दी जाए।
ग्राम वासियों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकानों की बकाया किश्तें जारी करने की मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि 1981 में ग्राम पंचायत द्वारा दिए गए प्लाटों पर वे पिछले 35-40 वर्षों से रह रहे हैं, लेकिन उन्हें आज तक मालिकाना हक नहीं मिला है।
इस अवसर पर सैंकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया, जिनमें मंजू रानी, ओमपति, सुनीता, रामरति, मीना, दलवीर, बलवान, सतबीर, सुनील, अश्वनी, उमेश, हर्ष, पवन, और जयप्रकाश शामिल थे।
