ममता बनर्जी का विपक्षी एकता का आह्वान, कांग्रेस और लेफ्ट ने किया अस्वीकार
ममता बनर्जी का नया राजनीतिक कदम
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में 15 वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी ने अपने पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। भाजपा के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बनाने के लिए, ममता ने कांग्रेस और वाम दलों को एकजुट होने का आमंत्रण दिया। लेकिन, जिस वाम दल को उन्होंने सत्ता में आने के लिए हराया था, उसने अब कांग्रेस के साथ मिलकर उनके इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिससे ममता को एक बड़ा झटका लगा है।
कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस का तीखा तंज- क्या माओवादियों से मिलाएंगी हाथ?
ममता बनर्जी के विपक्षी एकता के आह्वान पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के प्रवक्ता सौम्य आइच राय ने ममता के प्रस्ताव पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि ममता ऐसा कह रही हैं। उन्होंने ममता द्वारा 'अति-वामपंथियों' को साथ लाने की बात पर सवाल उठाया। कांग्रेस ने पूछा कि क्या ममता उन माओवादियों को शामिल करना चाहती हैं, जिन्होंने 2013 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के कई नेताओं की हत्या की थी?
लेफ्ट का स्पष्ट इनकार
लेफ्ट का भी साफ इनकार, कहा- अपराधियों और भ्रष्टाचारियों के साथ नहीं जाएंगे
कांग्रेस के बाद, वाम दलों ने भी ममता के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता मोहम्मद सलीम ने कहा कि वे ममता बनर्जी के साथ किसी भी स्थिति में मंच साझा नहीं करेंगे। वाम दलों ने टीएमसी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे किसी भी ऐसे व्यक्ति या दल को स्वीकार नहीं करेंगे जो अपराध या भ्रष्टाचार में लिप्त हो।
सत्ता जाते ही बदले सुर
सत्ता जाते ही बदले सुर, वीडियो जारी कर मांगी थी मदद
गौरतलब है कि भाजपा की सरकार बनने के बाद, ममता बनर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने सभी विपक्षी दलों और संगठनों से भाजपा के खिलाफ एकजुट होने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि सभी दलों को एक साथ आना चाहिए और उनके दरवाजे बातचीत के लिए खुले हैं।
राजनीतिक जानकारों की राय
कभी लेफ्ट का वजूद किया था खत्म, अब उसी से मांग रहीं संजीवनी
विशेषज्ञों का मानना है कि ममता का यह आह्वान पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है। ममता ने अपनी राजनीति का आधार कांग्रेस और वामपंथियों के विरोध पर रखा था, लेकिन अब भाजपा के उभार के कारण उन्हें वाम दलों से सहयोग मांगना पड़ रहा है।
