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ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी की सुप्रीम कोर्ट में याचिका: 17 गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें 17 गंभीर आरोप शामिल हैं। ईडी का आरोप है कि बनर्जी ने छापेमारी के दौरान सबूतों के साथ छेड़छाड़ की और महत्वपूर्ण दस्तावेज जबरन छीन लिए। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और ईडी की कार्रवाई के पीछे की कहानी।
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ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी की सुप्रीम कोर्ट में याचिका: 17 गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कार्रवाई


पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। ईडी ने 17 मामलों में सीबीआई जांच की मांग की है, जिसमें 8 जनवरी को आई-पैक के अधिकारियों के घर पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा गंभीर बाधा डालने का मामला भी शामिल है।


ईडी का आरोप है कि ममता बनर्जी ने छापेमारी के दौरान सबूतों के साथ छेड़छाड़ की और महत्वपूर्ण दस्तावेजों, जिनमें डिजिटल उपकरण भी शामिल थे, को जबरन छीन लिया। यह कार्रवाई अवैध कोयला खनन से जुड़े 2,742 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच का हिस्सा थी.


ईडी के आरोपों का विवरण

ईडी ने 8 जनवरी को आई-पैक के प्रमुख प्रतीक जैन के घर और कार्यालय पर तलाशी ली थी। छापेमारी सुबह से शुरू हुई और शांतिपूर्ण तरीके से चल रही थी। इसमें हवाला नेटवर्क के माध्यम से कोयला तस्करी से प्राप्त अवैध धन को आई-पैक तक पहुंचाने का आरोप लगाया गया।


छापेमारी के दौरान, दोपहर 12:05 बजे, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 100 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचीं। उन्होंने ईडी अधिकारियों को धमकाया और जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और दस्तावेजों को ट्रक में भरकर ले गईं। ईडी ने इसे अभूतपूर्व और चौंकाने वाला बताया, क्योंकि कानून के रक्षक खुद गंभीर अपराधों में शामिल हो गए।


ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप

ईडी ने अपनी याचिका में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत 17 संज्ञेय अपराधों का उल्लेख किया है, जिनमें डकैती, चोरी, सरकारी अधिकारी को ड्यूटी से रोकने के लिए बल प्रयोग, सबूत नष्ट करना और आपराधिक धमकी शामिल हैं। एजेंसी ने कहा कि मुख्यमंत्री, जो गृह मंत्री भी हैं, पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर जांच को बाधित करने में शामिल थीं।


ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि जब्त सामग्री तुरंत वापस की जाए, फोरेंसिक जांच कराई जाए और मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए। ईडी ने पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी, लेकिन मुख्यमंत्री के समर्थकों द्वारा अदालत में हंगामा करने के कारण सुनवाई 14 जनवरी तक टल गई।


सुरक्षा की मांग

ईडी का दावा है कि व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से कार्यकर्ताओं को बुलाया गया था। राज्य पुलिस द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज करने के बाद, एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा की मांग की है।