ममता बनर्जी के वकील बनने पर कानूनी विवाद, BCI ने मांगी रिपोर्ट
कोलकाता में ममता बनर्जी का हाई कोर्ट में पेश होना
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का काले कोट और वकील के गाउन में कलकत्ता हाई कोर्ट में उपस्थित होना अब एक गंभीर कानूनी मुद्दा बनता दिख रहा है। चुनाव के बाद हुई हिंसा के मामले में ममता बनर्जी ने खुद अदालत में दलीलें दीं, जिस पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने सख्त कदम उठाया है। बीसीआई ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को एक पत्र भेजकर 48 घंटे के भीतर ममता बनर्जी के वकालत के पंजीकरण और उनके पेशेवर स्थिति की विस्तृत जानकारी मांगी है, जिससे राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल मच गई है।
क्या नियमों का उल्लंघन हुआ?
कानूनी नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति संवैधानिक पद पर होता है, तो उसे उस समय अपने बार लाइसेंस को निलंबित करवाना होता है। पद से हटने के बाद इसे फिर से सक्रिय करना आवश्यक है। बीसीआई के सचिव श्रीरामंतो सेन ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर बंगाल बार काउंसिल के सचिव को पत्र लिखा है, जिसमें 2011 से 2026 तक ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री रहने के दौरान उनके वकालत के लाइसेंस के निलंबन और पुनः सक्रिय करने की स्थिति की जांच करने का निर्देश दिया गया है।
ममता बनर्जी का कोर्ट में उपस्थित होना
हाल ही में, ममता बनर्जी अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं चंद्रिमा भट्टाचार्य और कल्याण बनर्जी के साथ वकील के गाउन में कलकत्ता हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका की सुनवाई के लिए गई थीं। यह याचिका तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से वकील शीर्षन्या बंद्योपाध्याय ने दायर की थी, जिसमें 2026 के विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद टीएमसी कार्यालयों पर हुए हमलों और पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ हुई हिंसा का मुद्दा उठाया गया है। ममता ने अदालत में दलील दी कि चुनाव के बाद कई कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया और उन्हें बेघर होने पर मजबूर किया गया है। उनके इस वकील के रूप में उपस्थित होने ने एक नई बहस को जन्म दिया है।
