ममता बनर्जी के शासन में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर बढ़ते आरोप
तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर लटकती तलवार
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 15 साल के शासन के दौरान तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं पर लगे आरोपों का साया अब भी बना हुआ है। पुराने मामलों जैसे शिक्षक भर्ती घोटाला, चिटफंड घोटाला और कोयला तस्करी के मामले अभी भी चल रहे हैं। विशेष रूप से कोयला तस्करी मामले में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की पत्नी और उनके ससुराल के सदस्यों का नाम शामिल है, जिनके खिलाफ जांच जारी है।
अब जब सरकार में बदलाव हो रहा है, तो नए मामलों की शुरुआत की संभावना जताई जा रही है, जिसमें सोने की तस्करी और जमीन कब्जाने के मामले शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, सरकारी ठेकों और टेंडरों से जुड़े मामलों का भी खुलासा होने की उम्मीद है। कई नए नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं, जिसके चलते चुनाव परिणामों के साथ ही राज्य की सरकारी इमारतों के बाहर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
चुनाव से पहले यह चर्चा थी कि यदि ममता बनर्जी हारती हैं, तो सरकारी कार्यालयों से महत्वपूर्ण फाइलें गायब हो सकती हैं या आगजनी की घटनाएं हो सकती हैं। हालांकि, अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है। लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि चुनाव परिणामों से पहले सरकारी दफ्तरों के बाहर केंद्रीय बल तैनात किए गए हैं। राज्य के मुख्य सचिव ने सभी विभागों के प्रमुखों को निर्देशित किया है कि कोई भी फाइल बाहर नहीं जानी चाहिए। इसका मतलब है कि नई सरकार बनने के बाद सभी फाइलों की समीक्षा की जाएगी और उसके आधार पर नए मुकदमे दर्ज किए जा सकते हैं।
