महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती पर नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
महात्मा फुले की जयंती का आयोजन
दिल्ली: महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती पूरे देश में मनाई जा रही है। इस अवसर पर समाज में समानता और न्याय के लिए उनके योगदान को याद करते हुए सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। शनिवार को संसद भवन में भी देश के प्रमुख नेताओं ने फुले को नमन किया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई केंद्रीय नेताओं ने संसद परिसर में पुष्प अर्पित किए। इस कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, अर्जुन राम मेघवाल और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह भी उपस्थित थे।
President Droupadi Murmu paid floral tributes to Mahatma Jyotirao Phule on his birth anniversary at Prerna Sthal, Samvidhan Sadan. Mahatma Jyotirao Phule devoted his life to the upliftment of marginalized communities. He made significant contributions to the advancement of… pic.twitter.com/kPcPSM8DiL
— President of India (@rashtrapatibhvn) April 11, 2026
सभी नेताओं ने फुले के शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता के लिए किए गए ऐतिहासिक कार्यों को याद किया और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार ने कहा, "आज महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती है। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने लालकिले से आह्वान किया था कि इस अवसर को पूरे देश में भव्य तरीके से मनाया जाएगा। शनिवार को संसद परिसर में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा स्पीकर समेत कई नेता शामिल हुए।"
आपण महात्मा फुले यांच्या जयंतीच्या द्विशताब्दी वर्षात पाऊल ठेवत असल्याच्या पार्श्वभूमीवर, ते कशा प्रकारे अनेक लोकांसाठी मार्गदर्शक दीपस्तंभ ठरले आहेत तसेच त्यांनी शिक्षण, अध्ययन आणि सर्वांच्या कल्याणावर दिलेला भर आजच्या युगातही कसा समर्पक आहे, याबद्दलचे काही विचार लेखणीतून उतरवले…
— Narendra Modi (@narendramodi) April 11, 2026
वीरेंद्र कुमार ने आगे कहा, "जब शिक्षा केवल कुछ लोगों का विशेषाधिकार थी और बेटियों को शिक्षा से वंचित रखा जाता था, तब महात्मा फुले ने समानता और सभी के लिए शिक्षा के अधिकार की बात की। उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के माध्यम से पहले बालिका विद्यालय की स्थापना की, जिसके लिए उन्हें समाज का विरोध भी झेलना पड़ा।"
उन्होंने कहा, "200 साल बाद भी महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले द्वारा शुरू की गई अलख आज भी लोगों के दिलों में एक क्रांति की तरह जल रही है। उनकी जयंती को पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।"
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, "महात्मा फुले ने सत्य शोधक समाज की स्थापना की थी। सत्य और महिला सशक्तिकरण उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा थे। सावित्रीबाई फुले को इस देश की पहली महिला शिक्षिका होने का गर्व है। महात्मा फुले ने उन्हें पढ़ाने और स्कूल खोलने की अनुमति दी। उनका व्यक्तित्व अद्वितीय था।"
