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महानगरों में दहेज उत्पीड़न की चिंताजनक स्थिति: NCRB रिपोर्ट

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की हालिया रिपोर्ट 'क्राइम इन इंडिया 2024' ने महानगरों में दहेज उत्पीड़न की गंभीर स्थिति को उजागर किया है। बेंगलुरु, लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों में दहेज उत्पीड़न के मामलों की संख्या चिंताजनक है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में बेंगलुरु सबसे आगे है। जानें किस शहर में कितने मामले दर्ज हुए और घरेलू हिंसा की स्थिति क्या है।
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महानगरों में दहेज उत्पीड़न की चिंताजनक स्थिति: NCRB रिपोर्ट

NCRB की नई रिपोर्ट में दहेज उत्पीड़न की सच्चाई

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने 'क्राइम इन इंडिया 2024' शीर्षक से एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसमें महानगरों में दहेज उत्पीड़न की चिंताजनक स्थिति का खुलासा हुआ है। आमतौर पर यह माना जाता है कि शहरी क्षेत्र, ग्रामीण इलाकों की तुलना में अधिक प्रगतिशील होते हैं, लेकिन रिपोर्ट ने इस धारणा को चुनौती दी है।


इस रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु और लखनऊ जैसे शहरों में दहेज उत्पीड़न के कई मामले सामने आए हैं। लखनऊ, चेन्नई और हैदराबाद जैसे महानगर भी इस सामाजिक बुराई से अछूते नहीं रह पाए हैं।


दहेज उत्पीड़न के मामलों की संख्या

'क्राइम इन इंडिया 2024' रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के प्रमुख शहरों में कुल 1,008 दहेज उत्पीड़न के मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 878 मामले बेंगलुरु से हैं, जो कुल का लगभग 87 प्रतिशत है। लखनऊ दूसरे स्थान पर है, जहां 48 मामले दर्ज हुए हैं। बेंगलुरु दहेज उत्पीड़न के मामलों में सबसे ऊपर है, जहां 2024 में 25 मौतें हुईं।


दिल्ली में दहेज के कारण 109 मौतें हुईं, जबकि दक्षिण भारतीय शहरों जैसे चेन्नई, कोझिकोड, कोच्चि और कोयंबटूर में ऐसी कोई मौतें नहीं हुईं। हैदराबाद में 14 दहेज से संबंधित मौतें दर्ज की गईं।


महिलाओं के खिलाफ अपराधों की स्थिति

महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भी बेंगलुरु सबसे आगे है। विशेष और स्थानीय कानूनों के तहत यहां 1,051 मामले दर्ज किए गए हैं। महिलाओं के साथ छेड़छाड़ या शील भंग करने के 897 मामले बेंगलुरु में सामने आए, जबकि मुंबई में 857 मामले दर्ज हुए।


राज्यों में घरेलू हिंसा की स्थिति

कर्नाटक में पति या ससुराल पक्ष द्वारा घरेलू हिंसा के 2,947 मामले दर्ज किए गए हैं। उत्तर प्रदेश में 21,266 महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार हुईं, जबकि राजस्थान में 10,578 और महाराष्ट्र में 10,538 महिलाएं प्रभावित हुईं। पूरे देश में इस तरह के मामलों की सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश में है।