महाराष्ट्र चुनावों में स्याही विवाद: राहुल गांधी ने उठाए गंभीर सवाल
महाराष्ट्र में चुनावी स्याही पर विवाद
महाराष्ट्र: हाल ही में हुए नगर निगम चुनावों में मतदाताओं की उंगली पर लगाई गई स्याही को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। विपक्षी नेताओं और कुछ मतदाताओं का कहना है कि यह स्याही आसानी से मिटाई जा सकती है, जिससे फर्जी मतदान की संभावना बढ़ जाती है। इस मुद्दे पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की, जिसमें स्याही के मिटने के दावों का उल्लेख था। उन्होंने लिखा कि चुनाव आयोग द्वारा नागरिकों को गुमराह करना लोकतंत्र में विश्वास के पतन का कारण बनता है। उन्होंने इसे 'वोट चोरी' करार देते हुए इसे राष्ट्र-विरोधी कार्य बताया।
Election commission gaslighting citizens is how trust has collapsed in our democracy.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) January 16, 2026
Vote Chori is an anti-national act. pic.twitter.com/3FZKkDPwDg
उद्धव ठाकरे की निलंबन की मांग
उद्धव ठाकरे ने निलंबन की मांग की
यह विवाद मुख्य रूप से बृहनमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) सहित 29 नगर निगमों के चुनाव के दौरान सामने आया। शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राज्य चुनाव आयुक्त पर सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया और आयुक्त दिनेश वाघमारे के निलंबन की मांग की।
विपक्ष का कहना है कि सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें स्याही को हैंड सैनिटाइजर, एसीटोन या नेल पॉलिश रिमूवर से मिटाते हुए दिखाया गया है। कांग्रेस नेता वर्षा गायकवाड़ ने भी ऐसा एक वीडियो साझा किया था, जिससे मतदान की शुचिता पर सवाल उठे हैं।
राज्य चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण
राज्य चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण
राज्य चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। आयुक्त दिनेश वाघमारे ने स्पष्ट किया कि इस्तेमाल की गई स्याही अमिट है और इसे आसानी से नहीं मिटाया जा सकता। उन्होंने कहा कि एसीटोन या नेल पॉलिश से स्याही मिटने का दावा गलत है। आयोग ने जांच का आदेश दिया है और भ्रम फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
आयोग के बयान में कहा गया कि स्याही मिटाने की कोशिश अवैध है। यदि कोई व्यक्ति स्याही हटाकर दोबारा मतदान करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मतदान रिकॉर्ड से दोबारा वोटिंग असंभव है, क्योंकि मतदाता का नाम पहले ही दर्ज हो जाता है। आयोग ने मतदान कर्मचारियों को पहले ही निर्देश दे दिए थे कि स्याही मिटाने पर भी दोबारा मतदान की अनुमति नहीं मिलेगी।
लोकतंत्र में विश्वास की चुनौती
लोकतंत्र में विश्वास की चुनौती
यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में गहरा असर डाल रहा है। राहुल गांधी की टिप्पणी से स्पष्ट है कि विपक्ष चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है। चुनाव आयोग ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने जनता में संदेह पैदा किया है।
चुनावी स्याही का मुद्दा नया नहीं है, लेकिन इस बार यह इतना बड़ा हो गया कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। लोकतंत्र की मजबूती के लिए ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि मतदाताओं का भरोसा बना रहे।
