महाराष्ट्र में IVF रैकेट का भंडाफोड़: 37 बार अंडा दान करने वाली महिला का खुलासा
बदलापुर IVF रैकेट का मामला
महाराष्ट्र के बदलापुर में IVF रैकेट से जुड़ी एक गंभीर जानकारी सामने आई है। पुलिस ने उल्हासनगर की अदालत में 5000 पन्नों की चार्जशीट पेश की है, जिसमें एक महिला द्वारा अवैध रूप से 37 बार अंडों का दान करने का मामला उजागर हुआ है। भारत में एक बार से अधिक अंडा दान करना कानून के खिलाफ है। इस महिला ने बाद में एजेंट बनकर अन्य महिलाओं को अपने गिरोह में शामिल करना शुरू कर दिया।
महिलाओं को मिलने वाला मुआवजा
जांच में यह भी पता चला है कि महिलाओं को एक बार अंडा दान करने पर 25,000 से 30,000 रुपये का भुगतान किया जाता था। इन महिलाओं को बिना किसी चिकित्सा देखरेख के हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते थे, और बाद में इन अंडों को लाखों रुपये में बेचा जाता था।
आरोपियों की संख्या
पुलिस ने 88 दिनों की जांच के बाद चार्जशीट में 15 लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें पांच डॉक्टर भी शामिल हैं। अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनका गिरोह से सीधा संबंध पाया गया है। इसके अलावा, सात अन्य लोगों को नोटिस भी भेजा गया है। चार्जशीट में 25 गवाहों और 30 महिलाओं द्वारा लगभग 250 अंडाणु दान करने का उल्लेख किया गया है।
डॉक्टरों की जांच
पुलिस 30 डॉक्टरों और पीड़ितों के बीच वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। यह भी सामने आया है कि बारामती, पुणे, ठाणे और मुंबई के IVF क्लीनिक में एक ही महिला को कई बार अंडे दान करने के लिए मजबूर किया गया। नासिक में IVF सेंटर चलाने वाले डॉ. अमोल पाटिल के अलावा तीन महिला एजेंटों और सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह गरीब महिलाओं को निशाना बनाता था, जिन्हें अवैध रूप से 25 से 30 हजार रुपये का लालच देकर अंडे बेचने के लिए मजबूर किया जाता था।
अंडों की बिक्री
महिलाओं को बिना किसी चिकित्सा देखरेख के हार्मोनल इंजेक्शन दिए गए, और IVF सेंटर में जाकर अंडे निकाले गए, जिन्हें बाद में लाखों रुपये में बेचा गया। पुलिस का मानना है कि डॉ. अमोल पाटिल ने इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उल्लेखनीय है कि इसी साल मार्च में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उल्हासनगर के भगवान अस्पताल में छापेमारी की थी, जहां IVF नेटवर्क से जुड़ी अवैध सोनोग्राफी की जा रही थी।
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