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महाराष्ट्र में ठाकरे और पवार परिवार की राजनीतिक दिशा पर सवाल

महाराष्ट्र में हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों के परिणामों ने ठाकरे और पवार परिवार की राजनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों परिवारों ने अपने ब्रांड को बचाने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली। अब यह देखना होगा कि आगे की राजनीति में क्या बदलाव आते हैं, खासकर जब उद्धव और राज ठाकरे के बीच संभावित विलय की चर्चा हो रही है। पवार परिवार के लिए भी यह महत्वपूर्ण समय है, क्योंकि शरद पवार को अपने उत्तराधिकार का निर्णय लेना है।
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महाराष्ट्र में ठाकरे और पवार परिवार की राजनीतिक दिशा पर सवाल

भविष्य की अनिश्चितता

महाराष्ट्र में हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों के बाद, यह सवाल उठता है कि ठाकरे और पवार परिवार का भविष्य क्या होगा। दोनों परिवारों ने अपने ब्रांड को बचाने के लिए कई प्रयास किए, जिसमें अहंकार को छोड़कर एकजुट होना भी शामिल था। ठाकरे बंधु 20 साल बाद एक साथ आए, जबकि पवार चाचा-भतीजे ने भी हाथ मिलाया। उद्धव और राज ठाकरे को मुंबई का किला बचाना था, जबकि पवार परिवार को पुणे, पिंपरी चिंचवाड़ और परभणी में अपने पुराने गढ़ को पुनः प्राप्त करना था। दोनों परिवारों का लक्ष्य भाजपा के बढ़ते प्रभाव को रोकना और अपने वर्चस्व को बनाए रखना था। हालांकि, चुनाव में उन्हें केवल सांत्वना ही मिली।


आगे की राजनीति

अब सवाल यह है कि आगे ठाकरे परिवार का क्या होगा? क्या उद्धव और राज ठाकरे मिलकर राजनीति करेंगे और दोनों की पार्टियों का विलय होगा? पवार परिवार के लिए भी यही सवाल है कि क्या चाचा और भतीजे की पार्टी का विलय होगा? यदि ऐसा होता है, तो एनसीपी का स्थान क्या होगा? अजित पवार एनडीए में हैं, जबकि शरद पवार कांग्रेस गठबंधन में हैं। नगर निकाय चुनावों में सभी गठबंधन टूट गए थे, लेकिन चुनाव के बाद पार्टियों को अपने राजनीतिक भविष्य के अनुसार निर्णय लेना होगा। भाजपा ने लगातार तीन चुनाव जीतकर साबित किया है कि वह अब पूरे राज्य की पार्टी बन चुकी है।


ठाकरे परिवार की रणनीति

ठाकरे परिवार की आगे की राजनीति इस बात पर निर्भर करेगी कि उद्धव और राज ठाकरे अपने जीते हुए पार्षदों को एकजुट रख पाते हैं या नहीं। मुंबई में बीएमसी का बजट 74 हजार करोड़ रुपए है, और पार्षद इसी के माध्यम से अपनी और पार्टी की गतिविधियों को संचालित करते हैं। भाजपा इतनी उदार नहीं है कि वह एक बार अपना मेयर बनाने के बाद पूरी मुंबई को अपने अधीन कर ले। यदि उद्धव अपने पार्षदों को विचारधारा के आधार पर एकजुट रख पाते हैं, तो वे अगली लड़ाई के लिए तैयार रहेंगे। पवार परिवार के मामले में, शरद पवार को यह तय करना होगा कि वे अपना उत्तराधिकार भतीजे अजित पवार को सौंपकर रिटायर होते हैं या नहीं।