महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन और पेंशन का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए सेना की शॉर्ट सर्विस कमीशन महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन का अधिकार दिया है। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जवल भुईयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि सेना में केवल पुरुषों का वर्चस्व नहीं हो सकता। महिला अधिकारियों को भी स्थायी कमीशन और पेंशन का हक है।
महिला अधिकारियों की याचिका
कई महिला अधिकारियों ने स्थायी कमीशन के मामले में भेदभाव का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई की और भारतीय सेना में महिलाओं के खिलाफ प्रणालीगत भेदभाव को स्वीकार किया। अदालत ने अपनी विशेष संवैधानिक शक्तियों का उपयोग करते हुए उन महिला अधिकारियों के पक्ष में फैसला सुनाया जिन्हें स्थायी कमीशन से वंचित रखा गया था।
महिला अधिकारियों की भागीदारी
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाली महिला अधिकारियों में से कुछ 'आपरेशन सिंदूर' का हिस्सा भी थीं। अदालत ने कहा कि सेना में केवल पुरुषों का वर्चस्व नहीं हो सकता और महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन का समान अधिकार है। इसके साथ ही, जिनकी सेवा समाप्त हो चुकी है, उन्हें पेंशन भी मिलेगी। जजों ने भविष्य में चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए समीक्षा के निर्देश भी दिए हैं।
