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महिला आरक्षण पर केंद्र सरकार की नई पहल: विशेष सत्र में चर्चा की तैयारी

केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए विशेष सत्र का आयोजन करने की योजना बनाई है। 16 से 18 अप्रैल के बीच होने वाले इस सत्र में चर्चा और विधायी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी है। बीजेपी ने अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है, जबकि प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की है। कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सभी पक्षों की राय और आगे की योजना क्या है।
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महिला आरक्षण पर केंद्र सरकार की नई पहल: विशेष सत्र में चर्चा की तैयारी

महिला आरक्षण पर केंद्र की सक्रियता


नई दिल्ली: महिला आरक्षण को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है। 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद के विशेष सत्र में इस विषय पर चर्चा और विधायी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है। इस संदर्भ में, बीजेपी ने अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है, ताकि सभी सदस्य सदन में उपस्थित रहें। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की है, जबकि कांग्रेस ने इस प्रक्रिया की समयसीमा और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं.


सरकार की योजना और व्हिप का महत्व

महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए सरकार ने संसद के विशेष सत्र का आयोजन किया है। इस दौरान, बीजेपी ने अपने सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी किया है, जिसमें 16 से 18 अप्रैल तक सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि में किसी को भी छुट्टी नहीं दी जाएगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि कानून के कार्यान्वयन में कोई रुकावट न आए और सभी आवश्यक विधेयकों को पारित किया जा सके.


प्रधानमंत्री की अपील: दलगत राजनीति से ऊपर उठें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी किसी भी समाज के विकास के लिए आवश्यक है और अब समय आ गया है कि इस कानून को पूरी तरह लागू किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिला आरक्षण लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री ने इसे लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया.


कानून का बैकग्राउंड और आगे की योजना

नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 पहले ही पारित हो चुका है, लेकिन इसे लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया की आवश्यकता है। हाल ही में, कैबिनेट ने इस दिशा में दो नए विधेयक लाने को मंजूरी दी है। इन विधेयकों के माध्यम से परिसीमन आयोग के गठन और चुनावों में आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह कदम महिलाओं को राजनीतिक नेतृत्व में मजबूत भूमिका प्रदान करेगा.


कांग्रेस के सवाल और राजनीतिक विवाद

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बिना विपक्ष को भरोसे में लिए विशेष सत्र बुलाना उचित नहीं है। खड़गे ने यह भी पूछा कि जब कानून 30 महीने पहले पास हो चुका था, तो अब अचानक यह जल्दबाजी क्यों की जा रही है। उन्होंने परिसीमन से जुड़ी जानकारी साझा करने की मांग की और सुझाव दिया कि राज्य चुनावों के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, ताकि सभी पक्षों की राय ली जा सके.