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महिला सशक्तिकरण के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन की तैयारी

मोदी सरकार महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन लाने की योजना बना रही है। इस संशोधन का उद्देश्य महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की शर्तों से अलग करना है, जिससे महिलाओं को आरक्षण का लाभ जल्द ही मिलने लगेगा। गृह मंत्री अमित शाह विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं ताकि इस संशोधन पर सहमति बनाई जा सके। कांग्रेस ने इस प्रक्रिया में सभी दलों की भागीदारी की मांग की है। यह कदम 2027 के विधानसभा चुनावों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
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महिला सशक्तिकरण के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन की तैयारी

महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम


नई दिल्ली: मोदी सरकार महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। सूत्रों के अनुसार, आगामी संसदीय सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में एक महत्वपूर्ण संशोधन पेश किया जा सकता है। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की अनिवार्य शर्तों से अलग करना है, जिससे महिलाओं को आरक्षण का लाभ 2029 से पहले ही मिलने लगेगा।


आरक्षण की प्रक्रिया में तेजी लाने की योजना

नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के पारित होने के समय यह प्रावधान था कि इसे अगली जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू किया जाएगा। कोविड-19 महामारी के कारण 2021 की जनगणना नहीं हो पाई थी, जिससे 2011 के आंकड़ों के आधार पर इसे लागू करना संभव नहीं था। इसलिए, आरक्षण के लिए 2029 का लक्ष्य रखा गया था। अब सरकार इस कानून में संशोधन कर इन शर्तों को हटाना चाहती है ताकि प्रक्रिया तुरंत शुरू हो सके।


अमित शाह का राजनीतिक संवाद

गृह मंत्री अमित शाह इस महत्वपूर्ण बदलाव के लिए राजनीतिक सहमति बनाने में जुटे हैं। उन्होंने हाल ही में एनसीपी, सपा, बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस जैसे कई क्षेत्रीय दलों के नेताओं से मुलाकात की। इस बैठक में शिवसेना (यूबीटी) और एआईएमआईएम के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। सरकार का प्रयास है कि इस संशोधन पर व्यापक सहमति बने ताकि संसदीय कार्यवाही में कोई बाधा न आए। कांग्रेस और टीएमसी के साथ भी चर्चा की संभावना है।


विपक्ष की प्रतिक्रिया

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार के इस कदम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू को पत्र लिखकर मांग की है कि विधेयक को संसद में पेश करने से पहले एक औपचारिक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। विपक्ष चाहता है कि इस प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। खड़गे का मानना है कि इस कानून पर चर्चा सदन के बाहर और भीतर दोनों जगह गहनता से होनी चाहिए।


2027 के चुनावों पर प्रभाव

सरकार की योजना के अनुसार, अगले सप्ताह संसद में संशोधन विधेयक लाया जा सकता है। इस बिल के कानून बनने के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में 2027 के विधानसभा चुनावों से महिला कोटा लागू हो जाएगा। वर्तमान में इन दोनों राज्यों में चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। महिलाओं को आरक्षित सीटें मिलने से चुनावी परिदृश्य में बड़ा बदलाव आएगा। यह संशोधन भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण चुनावी कार्ड साबित हो सकता है।


महिला सशक्तिकरण का नया युग

एनडीए सरकार ने 27 साल से लटके इस बिल को विशेष सत्र बुलाकर ऐतिहासिक बहुमत से पारित किया था। इसे 'नारी शक्ति वंदन' नाम देकर सरकार ने महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया था। अब जनगणना और परिसीमन की बाधाओं को हटाना सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की आवाज अधिक मुखर होगी। यह कदम भारतीय राजनीति में लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।