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महिलाओं की सुरक्षा पर नारी 2025 रिपोर्ट: चिंताजनक आंकड़े और सुझाव

नई दिल्ली में जारी नारी 2025 रिपोर्ट ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताओं को उजागर किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बड़ी संख्या में महिलाएं अपने परिवेश में असुरक्षित महसूस करती हैं। सर्वेक्षण में 12,770 महिलाओं के अनुभवों के आधार पर उत्पीड़न के आंकड़े सामने आए हैं, जिसमें युवा महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई महिलाएं उत्पीड़न की घटनाओं की शिकायत नहीं करतीं। जानें इस रिपोर्ट में क्या सुझाव दिए गए हैं और सरकार से क्या अपेक्षाएं हैं।
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महिलाओं की सुरक्षा पर नारी 2025 रिपोर्ट: चिंताजनक आंकड़े और सुझाव

महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर चिंताएं

नई दिल्ली में जारी नारी 2025 रिपोर्ट ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर समाज और सरकार की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। यह रिपोर्ट केवल अपराध के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें महिलाओं के दैनिक अनुभव और अनकहे उत्पीड़न की कहानियों को भी शामिल किया गया है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि देश के बड़े शहरों में रहने वाली महिलाओं में से हर चार में से दो महिलाएं अपने आस-पास को सुरक्षित नहीं मानतीं।


उत्पीड़न के अनुभव

इस सर्वेक्षण में 12,770 महिलाओं के अनुभवों के आधार पर बताया गया है कि 7 प्रतिशत महिलाओं ने 2024 में उत्पीड़न का सामना किया। सबसे अधिक खतरे में 18 से 24 वर्ष की युवा महिलाएं पाई गईं। उत्पीड़न की घटनाओं में घूरना, फब्तियां कसना, अश्लील टिप्पणियां और छेड़छाड़ जैसी घटनाएं शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महिलाओं को असुरक्षा का अहसास केवल अपराधियों से नहीं, बल्कि खराब आधारभूत ढांचे, अंधेरी सड़कों और असुरक्षित सार्वजनिक परिवहन से भी होता है।


सबसे असुरक्षित शहर

ये शहर हैं सबसे अधिक असुरक्षित

सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि देश के कुछ बड़े शहर महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित साबित हो रहे हैं। इनमें दिल्ली, कोलकाता, रांची, श्रीनगर और फरीदाबाद शामिल हैं। वहीं, मुंबई को अपेक्षाकृत सुरक्षित माना गया है। इसके अलावा, कोहिमा, विशाखापट्टनम, भुवनेश्वर, आइजोल, गैंगटोक और ईटानगर को महिलाओं के लिए सुरक्षित शहरों की सूची में रखा गया है।


घटनाओं की छुपाने की वजहें

क्यों छुप जाती हैं घटनाएं

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उत्पीड़न का सामना करने के बावजूद अधिकांश महिलाएं शिकायत नहीं करतीं। केवल 22% महिलाओं ने कहा कि उन्होंने अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाई। शिकायत न करने के पीछे महिलाओं ने दो मुख्य कारण बताए हैं: एक तो दोबारा उत्पीड़न का डर और दूसरा समाज में बदनामी का भय। इसके अलावा, 53% महिलाएं यह भी नहीं जानतीं कि उनके कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए POSH नीति मौजूद है या नहीं।


सरकार से अपेक्षाएं

सरकार से क्या है अपेक्षा

यह रिपोर्ट नेशनल कमीशन फॉर वूमन की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर द्वारा जारी की गई है। इसे पीवैल्यू एनालिटिक्स ने तैयार किया है और ग्रुप ऑफ इंटेलेक्चुअल्स एंड एकेडमिकियंस (GIA) ने प्रकाशित किया है। लॉन्च कार्यक्रम में रहाटकर ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल आंकड़ों का विषय नहीं है, बल्कि हर महिला के जीवन का अहम हिस्सा है। वहीं, पीवैल्यू एनालिटिक्स के एमडी प्रह्लाद राउत ने उम्मीद जताई कि यह रिपोर्ट सरकार, कॉरपोरेट और समाज सभी को ठोस कदम उठाने के लिए प्रेरित करेगी ताकि प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिल सके।