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माता भगवती जागरण: श्रद्धा और सामाजिक समरसता का प्रतीक

माता भगवती जागरण का आयोजन श्रद्धा और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इस कार्यक्रम में हरियाणा के कई प्रमुख नेता और सामाजिक हस्तियां शामिल हुईं। जागरण का उद्देश्य न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट करना है, बल्कि यह मानसिक तनाव को कम करने और समाज में एकता को बढ़ावा देने का भी कार्य करता है। जानें इस आयोजन के महत्व और इसके पीछे की भावना के बारे में।
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माता भगवती जागरण: श्रद्धा और सामाजिक समरसता का प्रतीक

माता का जागरण: भक्तों की श्रद्धा का सशक्त माध्यम

माता का जागरण भक्तों के लिए अपनी श्रद्धा प्रकट करने का एक सशक्त माध्यम: हरविंदर कल्याण


भजन और ध्यान से मानसिक तनाव में कमी: तरुण भंडारी


जीवन में सकारात्मकता और सामाजिक समरसता लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम: वरुण मुलाना


चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): माता भगवती जागरण का आयोजन वरिष्ठ पत्रकार चन्द्र शेखर धरणी के परिवार द्वारा किसान भवन पंचकुला में किया गया। इस अवसर पर हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण, ऊर्जा मंत्री अनिल विज, पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार, शिक्षा मंत्री मही पाल ढांडा, निकाय मंत्री विपुल गोयल, डिप्टी स्पीकर कृष्ण मिढ़ा, हरियाणा राज्य चुनाव आयोग के आयुक्त देवेंद्र कल्याण, सांसद वरुण मुलाना, सी एम के राजनैतिक सचिव तरुण भंडारी, और कई अन्य प्रशासनिक, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां उपस्थित थीं।


यह जागरण कार्यक्रम रीता शर्मा की सेवानिवृत्ति के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जो हरियाणा के ई एस आई स्वास्थ्य केयर विभाग में नर्सिंग कैडर से एडीएन के पद पर पहुंचने वाली पहली महिला हैं।


अनिल विज ने कहा कि माता भगवती का जागरण सुख, समृद्धि और पारिवारिक शांति का प्रतीक है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में देवी-उपासना के महत्व पर जोर दिया और कहा कि यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा और सामूहिक आस्था का उत्सव है।


उन्होंने यह भी कहा कि जहां माता का जागरण होता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत से वातावरण पवित्र होता है, जिससे नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।


हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने कहा कि माता का जागरण भक्तों के लिए श्रद्धा प्रकट करने का एक सशक्त माध्यम है। इस दौरान भजन-कीर्तन और देवी गीतों के माध्यम से मां की महिमा का वर्णन किया जाता है।


कल्याण ने कहा कि यह आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का अवसर प्रदान करता है।


तरुण भंडारी ने कहा कि भक्ति में लीन रहना मानसिक संतुलन और शांति प्रदान करता है। यह ध्यान और साधना का भी एक रूप है।


वरुण मुलाना ने कहा कि माता का जागरण जीवन में सकारात्मकता और सामाजिक समरसता लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यह हमें आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा भी देता है।


तरुण भंडारी ने कहा कि माता शेरों वाली का जागरण श्रद्धा और भक्ति का संगम है। भक्त पूरी रात भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे मन को शांति मिलती है।


उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से समाज में भाईचारा और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ती है।


तरुण भंडारी ने यह भी कहा कि माता की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, इसलिए ऐसे धार्मिक आयोजनों का समाज में विशेष महत्व है।