मानसून की दस्तक: गर्मी से मिलेगी राहत, जानें कब आएगा बारिश
मानसून की तेजी से बढ़ती गतिविधियां
देशभर में चल रही भीषण गर्मी से लोगों को जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद है। दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ते हुए केरल के तट के करीब पहुंच चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम अपडेट के अनुसार, अगले 3-4 दिनों में मानसून के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर के अन्य हिस्सों, लक्षद्वीप, केरल और तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों के साथ-साथ बंगाल की खाड़ी के विभिन्न हिस्सों में आगे बढ़ने की अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।
मानसून की उत्तरी सीमा और गतिविधियां
IMD के अनुसार, मानसून की उत्तरी सीमा वर्तमान में अरब सागर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है, जो इसके लगातार आगे बढ़ने का संकेत देती है। केरल के दक्षिणी और मध्य क्षेत्रों में मानसून की पूर्व गतिविधियां तेज हो गई हैं। कई स्थानों पर बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं देखी जा रही हैं, जो यह दर्शाती हैं कि मानसून केरल में प्रवेश करने वाला है।
मानसून की बारिश की भविष्यवाणी
इस बार मानसून के संबंध में मौसम विज्ञानियों की भविष्यवाणियां चिंताजनक हैं। तिरुवनंतपुरम में IMD के निदेशक नीता के. गोपाल ने बताया कि इस जून में केरल सहित देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। अनुमान है कि मानसून की शुरुआत के बाद 10 जून के आसपास अच्छी बारिश हो सकती है, लेकिन उसके बाद बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ सकती हैं। ऐसे में जून में वर्षा का स्तर सामान्य से नीचे रहने की आशंका है।
उत्तर भारत में राहत की बारिश
पिछले कुछ दिनों में मौसम में बदलाव के कारण उत्तर भारत के लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। भले ही मानसून अभी दक्षिण भारत के करीब हो, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमी प्रणालियों के कारण उत्तर भारत में बारिश हुई है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड और उत्तराखंड जैसे कई राज्यों में आंधी-बारिश और तेज हवाओं ने गर्मी से राहत दी है।
दिल्ली-यूपी में मानसून की संभावित एंट्री
मौसम विभाग के अनुसार, यदि मानसून सामान्य गति से आगे बढ़ता है, तो यह जून के दूसरे पखवाड़े में मध्य भारत तक पहुंच सकता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून आमतौर पर जून के तीसरे सप्ताह में पहुंचता है, जबकि दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह जून के अंत या जुलाई की शुरुआत में दस्तक देता है। इस समय किसानों की नजर मानसून की आधिकारिक एंट्री और उसकी गति पर है, क्योंकि मानसून की गतिविधि खरीफ फसलों की बुवाई और कृषि गतिविधियों पर निर्भर करती है।
