मार्च 2026 में बेरोजगारी दर में हल्की वृद्धि: क्या है इसके पीछे का कारण?
बेरोजगारी दर में वृद्धि का हाल
नई दिल्ली: मार्च 2026 में देश में बेरोजगारी दर में मामूली वृद्धि देखी गई है। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों में यह दर फरवरी के 4.9 प्रतिशत से बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में हुई है।
शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की स्थिति
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी Periodic Labour Force Survey (PLFS) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर मार्च में 6.8 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि फरवरी में यह 6.6 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की बेरोजगारी दर स्थिर रही, लेकिन ग्रामीण पुरुषों में यह दर थोड़ी बढ़ी। कुल मिलाकर, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति अधिक गंभीर नहीं रही।
श्रम बल भागीदारी दर में कमी
मार्च 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) घटकर 55.4 प्रतिशत हो गई, जो फरवरी में 55.9 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 58 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह लगभग स्थिर बनी रही।
महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर मार्च में 34.4 प्रतिशत रही, जो फरवरी के 35.3 प्रतिशत से कम है। ग्रामीण महिलाओं में यह दर 38.9 प्रतिशत और शहरी महिलाओं में 25.2 प्रतिशत दर्ज की गई।
श्रमिक जनसंख्या अनुपात में स्थिरता
आंकड़ों के अनुसार, मार्च में समग्र श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR) 52.6 प्रतिशत रहा। शहरी क्षेत्रों में यह 46.8 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 55.5 प्रतिशत रहा। शहरी क्षेत्रों में WPR में ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह फरवरी की तुलना में थोड़ा कम हुआ।
ये आंकड़े कुल 3,75,262 लोगों के सर्वे पर आधारित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में बेरोजगारी में हुई यह छोटी बढ़ोतरी युवाओं और शिक्षित वर्ग को प्रभावित कर रही है। सरकार इन आंकड़ों पर ध्यान दे रही है और रोजगार बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं लागू कर रही है।
