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मालदा हिंसा मामले में मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी, 17 आरोपी रिमांड पर

पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में वकील मोफक्कारुल इस्लाम की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस ने 17 अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है, जिनमें ISF के उम्मीदवार शाहजहां अली शामिल हैं। शाहजहां ने खुद को निर्दोष बताया है, जबकि पुलिस के पास उनके खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए मामले की जांच NIA को सौंप दी है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और आगे की कार्रवाई के बारे में।
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मालदा हिंसा मामले में मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी, 17 आरोपी रिमांड पर

मालदा में न्यायिक अधिकारियों का बंधक बनाना

मालदा: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक में सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने और हिंसा भड़काने के मामले में पुलिस ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। वकील मोफक्कारुल इस्लाम, जिसे इस घटना का मास्टरमाइंड माना जा रहा है, को शुक्रवार सुबह गिरफ्तार किया गया। जानकारी के अनुसार, मोफक्कारुल राज्य से भागने की योजना बना रहा था और पुलिस को सूचना मिली थी कि वह बागडोगरा एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाला है। इसके बाद, पुलिस ने उसे एयरपोर्ट परिसर से पकड़ लिया। जांच एजेंसियों का मानना है कि मोफक्कारुल ने कालियाचक में भीड़ को भड़काने और सरकारी कार्यों में बाधा डालने की साजिश की थी। यह गिरफ्तारी उस समय हुई है जब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की टीम इस मामले की जांच के लिए मालदा पहुंचने वाली है।


आईएसएफ उम्मीदवार और अन्य आरोपी रिमांड पर

मालदा पुलिस की कार्रवाई: इस संवेदनशील मामले में, मालदा पुलिस ने लगातार छापेमारी करते हुए इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) के उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली सहित 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि उनके पास इन आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत हैं। सभी 17 आरोपियों को गुरुवार को जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान पूछताछ से इस हिंसक साजिश के और भी पहलू सामने आएंगे।


शाहजहां अली का बयान

शाहजहां का दावा: गिरफ्तार होने के बाद, आईएसएफ उम्मीदवार शाहजहां अली ने पुलिस के सभी आरोपों को खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध के तहत फंसाया जा रहा है। उनका कहना है कि जिस समय यह घटना हुई, वह वहां मौजूद नहीं थे, बल्कि एक धार्मिक कार्यक्रम से लौट रहे थे। हालांकि, पुलिस ने उनके दावों को नकारते हुए कहा है कि इस मामले में उनकी संलिप्तता के पुख्ता सबूत हैं।


बंधक बनाए गए अधिकारियों की स्थिति

घटना का विवरण: यह घटना पिछले बुधवार को शुरू हुई जब कालियाचक में एसआईआर का कार्य चल रहा था। वोटर लिस्ट से कुछ नाम हटाए जाने की खबर फैलते ही भीड़ उग्र हो गई। प्रदर्शनकारियों ने ब्लॉक ऑफिस को घेर लिया और तीन महिला अधिकारियों सहित कुल सात न्यायिक अधिकारियों को लगभग 9 घंटे तक बंधक बनाए रखा। इस दौरान अधिकारियों को न तो खाना दिया गया और न ही पानी।


सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया

NIA जांच: सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे न्याय प्रशासन में बाधा डालने का प्रयास करार दिया है। कोर्ट की फटकार के बाद, चुनाव आयोग ने इस मामले की जांच एनआईए को सौंप दी है। इसके साथ ही, चुनाव आयोग ने बिना अनुमति के किसी भी तरह की भीड़ इकट्ठा होने या जुलूस निकालने पर सख्त पाबंदी लगा दी है। कोर्ट ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्य सचिव और डीजीपी को भी नोटिस जारी किया है।