मुंबई चुनाव में स्याही विवाद: क्या है सच?
सियासी माहौल में गर्मी
नई दिल्ली: गुरुवार को मुंबई में बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव के दौरान मतदान के समय राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया जब सोशल मीडिया पर वोटरों की उंगली पर लगाई जाने वाली अमिट स्याही को लेकर सवाल उठने लगे। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि यह स्याही एसीटोन या नेल पॉलिश रिमूवर से मिटाई जा सकती है। बीएमसी ने इन आरोपों को खारिज किया, लेकिन विवाद बढ़ने पर राज्य चुनाव आयोग को जांच के आदेश देने पड़े।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
मतदान के दौरान कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें यह दावा किया गया कि वोट डालने के बाद उंगली पर लगाया गया निशान एसीटोन से साफ हो रहा है। इन वीडियो ने चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए। कुछ पोस्ट में यह भी कहा गया कि स्याही को दो बार धोने पर भी निशान हल्का पड़ जाता है। यह मुद्दा जल्द ही राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया।
राज ठाकरे का आरोप
'स्याही की जगह ऐसी मार्कर लाई गई'
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि पहले इस्तेमाल होने वाली स्याही की जगह ऐसी मार्कर पेन लाई गई है, जिसे हैंड सैनिटाइजर से भी हटाया जा सकता है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हर मुद्दे पर शोर मचाना गलत है और चुनाव आयोग इस पर उचित फैसला लेगा। राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने भी स्पष्ट किया कि 2011 से वही स्याही इस्तेमाल हो रही है और सूखने के बाद उसे मिटाया नहीं जा सकता।
कांग्रेस नेताओं का वीडियो
कांग्रेस नेताओं का आरोप
मुंबई कांग्रेस की नेता और लोकसभा सांसद वर्षा गायकवाड़ ने एक्स पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उनके पार्टी सहयोगी एसीटोन से अपनी उंगली का स्याही निशान हटाते नजर आते हैं। उन्होंने लिखा कि सुबह से कई रिपोर्ट मिल रही हैं कि वोटिंग के बाद लगाया गया निशान आसानी से मिट रहा है। उन्होंने बीएमसी चुनाव प्रबंधन पर जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
बीएमसी और चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण
बीएमसी और चुनाव आयोग का जवाब
बीएमसी ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया और कहा कि मतदान के दौरान इस्तेमाल की जा रही स्याही को लेकर फैलाई जा रही बातें भ्रामक हैं। विवाद बढ़ने पर राज्य चुनाव आयोग ने मामले की जांच के आदेश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि स्याही हटाने की कोशिश करना गैरकानूनी है और दोबारा वोट डालने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
कानूनी चेतावनी
स्याही हटाने पर कानूनी चेतावनी
राज्य चुनाव आयोग ने बयान जारी कर कहा कि मतदान केंद्र पर लगाई गई अमिट स्याही को हटाकर भ्रम फैलाना अपराध है। आयोग ने बताया कि हर वोट का रिकॉर्ड रखा जाता है, इसलिए स्याही हटने के बावजूद कोई व्यक्ति दोबारा मतदान नहीं कर सकता। मतदान कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे किसी भी प्रयास पर तुरंत रोक लगाई जाए।
