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मुंबई नगर निगम चुनाव: भाजपा और शिव सेना का गठबंधन बहुमत के करीब

मुंबई नगर निगम चुनाव में भाजपा और शिव सेना का गठबंधन बहुमत के करीब पहुंच गया है, जिससे बीएमसी में 50 साल के ठाकरे परिवार के वर्चस्व का अंत हो सकता है। चुनाव परिणामों के अनुसार, भाजपा को 87 सीटें मिलीं, जबकि शिव सेना ने 27 सीटें हासिल कीं। उद्धव ठाकरे की शिव सेना ने 67 सीटें प्राप्त कीं। यह चुनाव मुंबई के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि भाजपा पहली बार मेयर बनने की स्थिति में है। जानें इस चुनाव के परिणाम और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में।
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मुंबई नगर निगम चुनाव: भाजपा और शिव सेना का गठबंधन बहुमत के करीब

बीएमसी में बदलाव का नया दौर

मुंबई। एशिया के सबसे बड़े नगर निगम, बीएमसी में शिव सेना और ठाकरे परिवार का लगभग 50 साल का प्रभुत्व समाप्त हो गया है। हालांकि, उद्धव और राज ठाकरे ने अपनी राजनीतिक जमीन को आसानी से नहीं छोड़ा। दोनों दलों के गठबंधन ने भाजपा को कड़ी चुनौती दी है। 15 जनवरी को हुए मतदान के बाद सभी एक्जिट पोल एकतरफा परिणाम की भविष्यवाणी कर रहे थे, लेकिन शुक्रवार की रात तक की गिनती में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिव सेना का गठबंधन मुश्किल से बहुमत तक पहुंच पाया। गिनती देर रात तक जारी रही।


देर रात तक के आंकड़ों के अनुसार, 227 सदस्यों वाली बीएमसी में भाजपा को 87 सीटें मिलीं, जबकि उसकी सहयोगी शिव सेना ने 27 सीटें हासिल कीं। इस प्रकार, दोनों ने मिलकर 114 सीटों के बहुमत के आंकड़े को पार किया। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे की शिव सेना ने 67 सीटें प्राप्त कीं, जबकि राज ठाकरे की मनसे को 10 सीटें मिलीं। कांग्रेस ने बहुजन वंचित अघाड़ी और शरद पवार की एनसीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और 23 सीटें जीतने में सफल रही।


मुंबई के इतिहास में यह पहली बार हो सकता है कि भाजपा का मेयर बने। आजादी के बाद पिछले 77 वर्षों से मुंबई नगर निगम पर कांग्रेस और शिव सेना का ही नियंत्रण रहा है। 1947 से 1967 तक कांग्रेस का मेयर रहा, इसके बाद से शिव सेना का मेयर बना। भाजपा के गठन के बाद, शिव सेना ने 1980 में मुंबई में अपना मेयर बनाया था। अब, भाजपा अपने गठन के 45 साल बाद पहली बार मुंबई में अपना मेयर बनाने की स्थिति में है। शिव सेना के साथ गठबंधन में, भाजपा ने 1992 से 2017 तक शिव सेना के मेयर को समर्थन दिया था।