मुंबई में चुनावी हलचल: उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच सियासी जंग
मुंबई में चुनाव परिणामों के बाद की स्थिति
मुंबई: देश की सबसे धनी नगर निगम के चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक परिदृश्य में हलचल तेज हो गई है। सत्ताधारी गठबंधन ने बहुमत हासिल कर लिया है, लेकिन इसके बावजूद अंदरूनी बेचैनी स्पष्ट है। भाजपा और शिवसेना के बीच एक अजीब सा डर देखने को मिल रहा है। इस डर का सबसे बड़ा उदाहरण पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का हालिया कदम है, जब उन्होंने अपने सभी 29 पार्षदों को तुरंत बांद्रा के एक भव्य होटल में स्थानांतरित कर दिया।
इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा को बढ़ावा दिया है कि क्या मुंबई में एक नया राजनीतिक मोड़ देखने को मिलेगा या यह केवल एक साजिश है। शिंदे के समर्थकों का कहना है कि यह कदम किसी भी संभावित फूट या सेंधमारी से बचने के लिए उठाया गया है। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे ने एक रहस्यमय संदेश देकर मुंबई की राजनीति में हलचल मचा दी है, जिसमें उन्होंने कहा कि मेयर शिवसेना का ही होगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि अब रिजॉर्ट राजनीति और होटल घेराबंदी का दौर शुरू होने वाला है।
उद्धव ठाकरे का बयान
उद्धव का हुंकार
हालांकि शिवसेना ने बीएमसी से अपना दशकों पुराना नियंत्रण खो दिया है, लेकिन उद्धव ठाकरे के तेवर में कोई कमी नहीं आई है। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "मुंबई में शिवसेना का मेयर चुनना मेरा सपना है और हम इसे पूरा करेंगे।" उन्होंने भाजपा और शिंदे गुट पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उन्होंने चुनाव जीतने के लिए सभी तरीके अपनाए, लेकिन शिवसैनिकों की वफादारी नहीं खरीद पाए। उद्धव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता के लालच में मुंबई को गिरवी रख दिया है और मराठी मानुष इसे कभी माफ नहीं करेगा।
शिंदे गुट की चिंता
शिंदे कैंप में नंबर गेम का डर
यह सवाल उठता है कि जब भाजपा और शिंदे गुट के पास बहुमत है, तो पार्षदों को होटल में क्यों छिपाया जा रहा है? गणित दिलचस्प है। सत्तारूढ़ गठबंधन बहुमत (114) से केवल 4 सीटें ऊपर है। ऐसे में यदि मेयर चुनाव से पहले 5 पार्षद भी इधर-उधर हुए, तो सत्ता हाथ से निकल सकती है। शिंदे को डर है कि उद्धव ठाकरे किसी गुप्त योजना के तहत कोई चाल न चल दें, जिससे सत्ता का पासा पलट जाए।
बहुमत का आंकड़ा: 114
बीजेपी की सीटें: 89
एकनाथ शिंदे गुट: 29
कुल: 118
मेयर चुनाव का महत्व
मेयर चुनाव बना साख की लड़ाई
227 सदस्यों वाली बीएमसी पर नियंत्रण का मतलब है मुंबई की वित्तीय संपत्ति पर नियंत्रण। भाजपा जहां पहली बार रिकॉर्ड सीटें जीतकर अपना मेयर बनाने का सपना देख रही है, वहीं उद्धव ठाकरे के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है। उद्धव ने कार्यकर्ताओं से कहा कि गद्दार चले गए हैं, लेकिन असली शिवसेना जमीन पर मजबूती से खड़ी है।
