मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज, राजनीतिक हलचल तेज
महाभियोग प्रस्ताव का खारिज होना
महाभियोग प्रस्ताव: पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के दौरान, विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए जो महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था, उसे संसद के दोनों सदनों ने खारिज कर दिया है। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, जिससे राजनीतिक माहौल में हलचल बढ़ गई है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा, "नोटिस को खारिज करने का कोई उचित कारण नहीं था। सरकार को चुनाव आयोग का समर्थन करना चाहिए, और इसी आधार पर यह प्रस्ताव खारिज किया गया। इसका मतलब है कि नरेंद्र मोदी की सरकार चुनाव आयोग के माध्यम से लोकतंत्र को कमजोर कर रही है।"
शिवसेना का आरोप
शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने कहा, "वर्तमान चुनाव आयोग को बीजेपी के पक्ष में काम करने का कार्य सौंपा गया है। ज्ञानेश कुमार को इसीलिए नियुक्त किया गया है क्योंकि बीजेपी लोकतांत्रिक तरीके से बंगाल में जीत नहीं हासिल कर सकती।" उन्होंने आगे कहा कि यदि महाभियोग प्रस्ताव लाया गया है, तो सरकार उन्हें बचाने की कोशिश करेगी।
पक्षपात के आरोप
विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें पक्षपातपूर्ण रवैया और चुनावी धोखाधड़ी की जांच में बाधा डालने का आरोप शामिल है। हालांकि, राज्यसभा और लोकसभा के अध्यक्षों ने संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
लोकसभा सचिवालय का नोटिस
लोकसभा के सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि प्रस्ताव के नोटिस पर अध्यक्ष का निर्णय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत लिया गया है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि 12 मार्च, 2026 को 130 सदस्यों के हस्ताक्षर के साथ प्रस्तुत प्रस्ताव को माननीय लोकसभा अध्यक्ष ने स्वीकार नहीं किया।
