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मुख्यमंत्री धामी का यमकेश्वर में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान संबोधन

उत्तराखंड के यमकेश्वर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रयासों का जिक्र किया और चारधाम यात्रा को सुगम बनाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। इस कार्यक्रम में स्थानीय विधायक रेनू बिष्ट ने भी विकास कार्यों की सराहना की। भागवत कथा के महत्व पर भी चर्चा की गई, जिसमें नैतिक मूल्यों और मानवता के आदर्शों की प्रेरणा दी गई।
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मुख्यमंत्री धामी का यमकेश्वर में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान संबोधन

यमकेश्वर में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा

उत्तराखंड: यमकेश्वर के वानप्रस्थ आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत भगवान श्रीकृष्ण का जीवंत रूप है, जो मानवता को धर्म, ज्ञान और भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों का भी उल्लेख किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चारधाम यात्रा मार्गों के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण के कारण यात्रा अब अधिक सुगम और सुरक्षित हो गई है। प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं चल रही हैं।


उन्होंने कालसी-हरीपुर क्षेत्र में यमुना नदी के किनारे घाटों के निर्माण, शारदा कॉरिडोर, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर और दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज की स्थापना जैसे विकास कार्यों का उल्लेख किया, जो प्रदेश की आर्थिकी और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर रहे हैं।




स्थानीय विधायक रेनू बिष्ट ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार के प्रयासों के कारण यमकेश्वर क्षेत्र में विकास कार्यों को नई गति मिली है, जिससे स्थानीय निवासियों को लाभ हो रहा है।


इस अवसर पर भागवत कथा का वाचन कर रहे पूज्य गोविन्द देव गिरी जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, आस्था और सत्कर्म के मार्ग पर चलने का प्रेरणादायक संदेश दिया।


परमार्थ आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह समाज को नैतिक मूल्यों और मानवता के उच्च आदर्शों की ओर प्रेरित करने का एक सशक्त माध्यम है।