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मोदी सरकार शिक्षा और खाद्य सुरक्षा कानून में सुधार की योजना बना रही है

केंद्र सरकार शिक्षा का अधिकार और खाद्य सुरक्षा कानून में सुधार की योजना बना रही है। पहले चरण में नियमों में बदलाव की कोशिश की जाएगी, और यदि आवश्यक हुआ तो नए विधेयक संसद में पेश किए जाएंगे। इस प्रक्रिया में सभी लाभार्थियों का पंजीकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा। जानें इस सुधार के पीछे के उद्देश्य और संभावित प्रभाव।
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मोदी सरकार शिक्षा और खाद्य सुरक्षा कानून में सुधार की योजना बना रही है

नियमों में सुधार की प्राथमिकता


केंद्र सरकार शिक्षा का अधिकार और खाद्य सुरक्षा कानून में सुधार करने की दिशा में कदम उठा रही है। पहले चरण में, सरकार नियमों और आदेशों में बदलाव करने का प्रयास करेगी। यदि यह प्रयास सफल नहीं होता है, तो संसद में नए विधेयक पेश किए जा सकते हैं। इसके साथ ही, सरकार यह भी विचार कर रही है कि लोगों को आवास का अधिकार कानूनी रूप में दिया जाए।


मनमोहन सरकार के कानूनों में कमियां

एक अधिकारी ने बताया कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल में बनाए गए विकास से संबंधित कानूनों में तीन प्रमुख कमियां थीं। इन कानूनों के कारण न तो सभी बच्चों को उचित शिक्षा मिल पाई और न ही खाद्य सुरक्षा हर परिवार तक पहुंच सकी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्देश दिया है कि सभी लाभार्थियों का 100% पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए।


सरकार के लक्ष्य

सरकार का उद्देश्य है कि योजनाओं की पूरी कवरेज के लिए समय-सीमा के साथ लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। इन लक्ष्यों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लागू किया जाएगा और रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी।


खाद्य सुरक्षा कानून का उद्देश्य

भारत में खाद्य सुरक्षा कानून का मुख्य उद्देश्य लोगों को सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है। यह कानून कई पुराने खाद्य कानूनों को मिलाकर बनाया गया है और इसके अंतर्गत फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की स्थापना की गई है।


शिक्षा का अधिकार

भारत में 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत दिया गया है और 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ।