मोहन भागवत का बड़ा बयान: RSS को BJP से जोड़ना है एक गंभीर गलती
RSS और BJP के बीच की गलतफहमी
नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि संघ को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दृष्टिकोण से देखना एक गंभीर गलती है। उन्होंने कहा कि संघ भले ही शारीरिक गतिविधियों में संलग्न हो, लेकिन यह किसी अर्धसैनिक संगठन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह बयान उन्होंने एक प्रबुद्ध सभा में दिया, जहां उन्होंने संघ की भूमिका और उसके उद्देश्य पर चर्चा की।
संघ का उद्देश्य समाज को एकजुट करना
भागवत ने बताया कि संघ का मुख्य लक्ष्य समाज को एकजुट करना और ऐसे गुणों का विकास करना है, जिससे देश भविष्य में किसी विदेशी शक्ति के अधीन न हो। उन्होंने यह भी कहा कि संघ किसी राजनीतिक दल की शाखा नहीं है, बल्कि यह समाज को आत्मनिर्भर और संगठित बनाने का एक माध्यम है।
RSS को BJP या विद्या भारती से जोड़ना गलत
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई भाजपा के संदर्भ में संघ को समझने की कोशिश करेगा, तो यह एक बड़ी गलती होगी। यही गलती तब भी होगी जब कोई विद्या भारती को देखकर संघ का मूल्यांकन करेगा। भागवत ने कहा कि संघ का वैचारिक संबंध जनसंघ और भाजपा से जोड़ा जाता रहा है, लेकिन इससे संघ के असली स्वरूप को समझना संभव नहीं है।
संघ के खिलाफ झूठा विमर्श
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि संघ के बारे में समाज में एक झूठा विमर्श फैलाया गया है। उन्होंने चिंता जताई कि लोग आजकल किसी विषय को गहराई से समझने के बजाय सतही जानकारी पर भरोसा कर लेते हैं। भागवत ने कहा कि लोग विकिपीडिया पर निर्भर होकर निष्कर्ष निकाल लेते हैं, जबकि वहां दी गई जानकारी हमेशा सही नहीं होती।
संघ का जन्म किसी विरोध से नहीं
भागवत ने संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर के दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि आम धारणा है कि संघ किसी विरोध या प्रतिक्रिया के रूप में बना, जबकि यह सच नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ न तो किसी के विरोध में बना और न ही वह किसी से प्रतिस्पर्धा करता है।
इतिहास से सीखने की आवश्यकता
भागवत ने भारतीय इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि अंग्रेज भारत पर हमला करने वाले पहले नहीं थे। उन्होंने बताया कि कई बार बाहरी आक्रांता आए, जो भारतीयों से संसाधनों और नैतिकता में कमजोर थे, फिर भी वे देश को पराजित करने में सफल रहे। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसा बार-बार क्यों हुआ और समाज को आजादी को स्थायी बनाए रखने के लिए क्या करना चाहिए।
स्वार्थ से ऊपर उठकर एकजुट होना जरूरी
संघ प्रमुख ने कहा कि समाज को व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर एकजुट होना होगा। यदि समाज मूल्यों और सद्गुणों के साथ एकजुट होता है, तो देश का भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल हो सकता है। उन्होंने बताया कि संघ अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है और बाहरी धन पर निर्भर नहीं है, हालांकि इसके शुरुआती वर्षों में कई आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
संघ को समझने के लिए शाखा में आने की अपील
अपने संबोधन के अंत में मोहन भागवत ने लोगों से आग्रह किया कि वे संघ को समझने के लिए किसी शाखा में शामिल हों। उन्होंने कहा कि केवल सुनने या पढ़ने से संघ को पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “अगर मैं दो घंटे तक बताऊं कि चीनी कितनी मीठी होती है, तब भी बात पूरी नहीं होगी। एक चम्मच चीनी चख लीजिए, खुद समझ में आ जाएगा।”
