मोहन भागवत का बयान: संघ काशी और मथुरा आंदोलनों का समर्थन नहीं करेगा

मोहन भागवत का महत्वपूर्ण बयान
मोहन भागवत का बयान: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को दिल्ली में एक व्याख्यान कार्यक्रम के समापन पर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ काशी और मथुरा से जुड़े आंदोलनों का समर्थन नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि संघ के स्वयंसेवक व्यक्तिगत रूप से इन आंदोलनों में भाग ले सकते हैं।
राम मंदिर आंदोलन का समर्थन
भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन एकमात्र ऐसा अभियान था जिसे संघ ने समर्थन दिया। इसके अलावा, संघ किसी अन्य धार्मिक आंदोलन में शामिल नहीं होगा। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि काशी और मथुरा के आंदोलनों में संघ का कोई आधिकारिक समर्थन नहीं रहेगा, लेकिन स्वयंसेवक स्वतंत्र रूप से इसमें भाग ले सकते हैं।
स्वयंसेवकों की स्वतंत्रता पर जोर
भागवत ने अपने बयान में कहा कि राम मंदिर आंदोलन ही एकमात्र ऐसा आंदोलन है जिसका संघ ने समर्थन किया है। अब संघ किसी अन्य आंदोलन का हिस्सा नहीं बनेगा, लेकिन हमारे स्वयंसेवक यदि चाहें तो व्यक्तिगत रूप से जुड़ सकते हैं। उनके इस बयान ने काशी और मथुरा के आंदोलनों से जुड़े संगठनों और कार्यकर्ताओं में हलचल पैदा कर दी है।
रिटायरमेंट पर स्पष्टता
कार्यक्रम के दौरान भागवत से 75 वर्ष की उम्र में रिटायरमेंट के विषय पर भी सवाल पूछा गया। उन्होंने कहा कि संघ में रिटायरमेंट जैसी कोई परंपरा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि 75 साल की उम्र में कोई पद छोड़ना अनिवार्य है। संघ में हर स्वयंसेवक तब तक जिम्मेदारी निभाता है जब तक संगठन चाहे। उन्होंने कहा कि हम जीवन में किसी भी समय पद छोड़ने के लिए तैयार हैं क्योंकि उम्र का इससे कोई संबंध नहीं है। जब तक संघ चाहे, तब तक कार्य करते रहेंगे।
संघ की 100वीं वर्षगांठ पर विचार
यह बयान संघ की 100वीं वर्षगांठ समारोह के दौरान आया है, जहां भागवत ने संगठन की कार्यप्रणाली और सिद्धांतों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि संघ सेवा और राष्ट्रहित के मार्ग पर आगे बढ़ता रहेगा।