मोहन भागवत का संदेश: सरकार और समाज के बीच तालमेल से ही संभव है विकास

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण
राष्ट्रीय समाचार: मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का केंद्र और राज्य सरकारों के साथ संबंध सकारात्मक है। उनका कहना है कि संघ टकराव की बजाय सहयोग और संवाद को प्राथमिकता देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार और समाज का मुख्य उद्देश्य जनता की भलाई है, और इसी सोच से सकारात्मक परिवर्तन संभव हैं। भागवत ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज भी हमारी प्रणाली ब्रिटिश काल के ढांचे पर आधारित है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों द्वारा स्थापित शासन प्रणाली आज भी कई क्षेत्रों में लागू है। भागवत ने कहा कि इस पुरानी संरचना में बदलाव और नवाचार लाना अत्यंत आवश्यक है ताकि देश की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
सत्ता को समय और स्वतंत्रता
सत्ता को वक़्त और आज़ादी
संघ प्रमुख ने कहा कि सत्ता में बैठे व्यक्तियों से तात्कालिक बदलाव की अपेक्षा करना गलत है। उन्होंने कहा कि भले ही नेता पूरी ईमानदारी से बदलाव लाना चाहें, लेकिन हर बार तुरंत परिणाम नहीं मिलते। इसलिए, सरकारों को समय, स्थान और स्वतंत्रता प्रदान करनी चाहिए ताकि वे धीरे-धीरे ठोस कदम उठा सकें।
सकारात्मक दृष्टिकोण से तरक्की
टकराव नहीं, तालमेल से तरक़्क़ी
मोहन भागवत ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि सरकार और संघ के बीच कोई विवाद या टकराव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर कार्य करें, तो विकास की गति को और तेज किया जा सकता है। विवाद के बजाय सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने से जनता को बेहतर परिणाम मिलते हैं।
समाज और सरकार की जिम्मेदारी
समाज और सरकार की भूमिका
भागवत ने बताया कि बदलाव केवल सरकार के प्रयासों से नहीं होता। समाज को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होती है। यदि संस्कार, परंपरा और शिक्षा एक साथ चलें, तो देश की तस्वीर बदल सकती है। उन्होंने कहा कि संघ हमेशा इस तालमेल को मजबूत करने के लिए कार्य करता है।
नवाचार और सुधार की आवश्यकता
बदलाव और नवाचार की ज़रूरत
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत को नए युग में आगे बढ़ाने के लिए नवाचार और सुधार आवश्यक हैं। पुरानी परंपराओं को बनाए रखते हुए नई सोच और तकनीक को अपनाना होगा। तभी देश आत्मनिर्भर बनेगा और समाज की बुनियादी आवश्यकताएं पूरी होंगी।
बेहतर भारत की आकांक्षा
बेहतर भारत की तस्वीर
भागवत ने कहा कि यदि सरकार और समाज मिलकर काम करें, कानून और व्यवस्था का सम्मान करें और सकारात्मक सोच रखें, तो भारत की तस्वीर और बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि असली शिक्षा वही है जो व्यक्ति को संस्कारी, जिम्मेदार और रचनात्मक बनाती है। यही रास्ता समाज और शासन दोनों को मजबूत करता है।