मोहन भागवत को मिली सुरक्षा पर उठे सवाल, सरकार ने जानकारी देने से किया इनकार
मोहन भागवत को मिली एडवांस सिक्योरिटी
आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत को भारत सरकार द्वारा एडवांस सिक्योरिटी लाइजन (ASL) सुरक्षा प्रदान की गई है। इस सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाले खर्च की जानकारी गृह मंत्रालय और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) से सूचना का अधिकार (RTI) के माध्यम से मांगी गई थी, लेकिन सरकार ने इसे साझा करने से मना कर दिया है।
गृह मंत्रालय का जवाब
गृह मंत्रालय ने RTI आवेदनों के उत्तर में बताया कि सुरक्षा और गोपनीयता से संबंधित चिंताओं के कारण यह जानकारी नहीं दी जा सकती। मंत्रालय ने RTI अधिनियम की धारा 8(1)(g) और 8(1)(j) का उल्लेख किया है, जो अधिकारियों को ऐसी जानकारी देने से रोकती है जो किसी की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है या गोपनीयता का उल्लंघन कर सकती है। आवेदनों में 2015 से अब तक भागवत की सुरक्षा पर खर्च की विस्तृत जानकारी मांगी गई थी, जिसमें CISF कर्मियों, पुलिस तैनाती, वाहनों, सुरक्षा उपकरणों और यात्रा व्यवस्थाओं से संबंधित खर्च शामिल था।
CISF का जानकारी देने से इनकार
CISF ने भी जानकारी साझा करने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया है। उनके जवाब में कहा गया है कि RTI अधिनियम की धारा 24 के तहत उन्हें ऐसी जानकारी साझा करने से छूट मिली हुई है, क्योंकि यह एक रिजर्व सुरक्षा संगठन है। CISF ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कानून के तहत केवल भ्रष्टाचार या मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों का ही खुलासा किया जा सकता है।
विवाद का कारण
यह मुद्दा इसलिए चर्चा में है क्योंकि मोहन भागवत न तो किसी संवैधानिक पद पर हैं और न ही सरकारी अधिकारी हैं। वह केवल RSS के प्रमुख हैं, जो एक गैर-सरकारी संगठन है। इसके बावजूद, उन्हें केंद्र सरकार से उच्च स्तर की सुरक्षा प्राप्त है। आलोचकों का कहना है कि इसमें करदाताओं का पैसा खर्च हो रहा है, इसलिए कम से कम कुल खर्च की जानकारी जनता के सामने आनी चाहिए, भले ही संवेदनशील जानकारी न दी जाए। हालांकि, गृह मंत्रालय और CISF ने इस जानकारी को साझा करने से इनकार कर दिया है।
