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मोहन भागवत ने पठानकोट में सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के साथ संवाद किया

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन राव भागवत ने पठानकोट में सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के साथ संवाद गोष्ठी में भाग लिया। उन्होंने संघ के कार्यों, सामाजिक समरसता, और राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में सामूहिक गायन और प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित अधिकारियों को प्रेरित किया गया। भागवत ने स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया। इस संवाद ने देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की भावना को उजागर किया।
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मोहन भागवत ने पठानकोट में सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के साथ संवाद किया

पठानकोट में संवाद गोष्ठी का आयोजन

पठानकोट - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन राव भागवत ने मंगलवार को पठानकोट में किरण ऑडिटोरियम में सेवानिवृत्त कमीशंड सैन्य अधिकारियों के साथ एक संवाद गोष्ठी को संबोधित किया। इस कार्यक्रम को प्रेरणादायक और गरिमापूर्ण बताया गया, जिसमें बड़ी संख्या में पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल हुए।


कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक रूप से “वन्दे मातरम्” के गायन से हुई। सभागार में “वन्दे मातरम्” के इतिहास और उससे जुड़े प्रोटोकॉल पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। इसके अलावा, तीनों सेनाओं के परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों का परिचय कराती प्रदर्शनी ने उपस्थित अधिकारियों को प्रेरित किया। अपने संबोधन में डॉ. भागवत ने संघ की स्थापना, उद्देश्य और कार्यपद्धति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि संघ को समझने के लिए उसके कार्य को निकट से जानना आवश्यक है। उनके अनुसार, संघ का उद्देश्य राष्ट्रहित को केंद्र में रखकर कार्य करना है, न कि प्रतिस्पर्धा या प्रचार की भावना से।


डॉ. भागवत ने सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक जीवन मूल्यों, स्वदेशी और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने भारतीय सेना को विविधता में एकता का प्रतीक बताया और कहा कि यह भावना समाज में भी मजबूत होनी चाहिए। उन्होंने अन्य राष्ट्रहितैषी संगठनों के साथ समन्वय और सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। “पंच परिवर्तन” का उल्लेख करते हुए उन्होंने सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों की मजबूती, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, स्वदेशी भावना और नागरिक कर्तव्यनिष्ठा को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया।


पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में उन्होंने संतुलित जीवनशैली पर जोर दिया। कार्यक्रम में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक और फ्लेक्स बैनरों का उपयोग नहीं किया गया। पारिवारिक मूल्यों पर बोलते हुए उन्होंने संयुक्त परिवार व्यवस्था को भारतीय समाज की ताकत बताया। स्वदेशी को आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए उन्होंने स्थानीय और गृह-आधारित उत्पादों को बढ़ावा देने की बात की। कार्यक्रम स्थल पर गौ सेवा संस्थान और ग्रामीण उत्पादों से जुड़े स्टॉल भी लगाए गए थे।


राष्ट्रीय सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि केवल सीमाओं की रक्षा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक एकता, आर्थिक सुदृढ़ता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। कार्यक्रम में प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारियों ने समसामयिक विषयों पर प्रश्न पूछे और सरसंघचालक ने विस्तार से उत्तर दिए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान “जन गण मन” के सामूहिक गायन के साथ हुआ। अंत में सभागार में देशभक्ति और राष्ट्रसेवा के संकल्प की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।