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यमन ने ईरान का समर्थन करते हुए बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद करने की दी चेतावनी

यमन ने ईरान के समर्थन में बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी दी है, जिससे वैश्विक तेल कीमतों और शिपिंग उद्योग पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह जलमार्ग बंद होता है, तो अमेरिका पर तेल की कीमतों का दबाव बढ़ जाएगा। यमन के हूती आंदोलन ने संकेत दिया है कि वे अपने सैन्य अभियानों को तेज कर सकते हैं यदि अमेरिका और इजरायल ईरान पर हमला करते हैं। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर हो सकती है।
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यमन ने ईरान का समर्थन करते हुए बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद करने की दी चेतावनी

यमन का ईरान के प्रति समर्थन

न्यूयॉर्क : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे मध्य पूर्व में तनाव फिर से बढ़ गया है। इस बीच, यमन ने ईरान के समर्थन में कदम बढ़ाया है। यमन, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण जलमार्ग बाब-अल-मंदेब को बंद करने की क्षमता रखता है, ने इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाई है।


यमन का खतरा : इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के यमन मामलों के विशेषज्ञ अहमद नागी ने बताया कि यमन का हूती अंसारुल्लाह आंदोलन अपने क्षेत्र में स्थिति को और भी गंभीर बना सकता है। यदि यमन इस समुद्री मार्ग को बंद करने का निर्णय लेता है, तो इसका वैश्विक तेल कीमतों और शिपिंग उद्योग पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।


अहमद नागी ने कहा, “अगर यमन बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को बंद कर देता है, तो अमेरिका पर तेल की कीमतों का दबाव दोगुना हो जाएगा। ईरान पहले से ही फारस की खाड़ी में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर प्रभाव रखता है। यदि ये दोनों प्रमुख जलमार्ग बाधित होते हैं, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लागू करता है और ईरान को नुकसान होता है, तो हूती आंदोलन बाब-अल-मंदेब में अपनी गतिविधियाँ बढ़ा सकता है।


यमन की चेतावनी के अनुसार, इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की पाबंदी से वैश्विक शिपिंग उद्योग पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। पहले से ही तनाव झेल रही अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन के लिए यह स्थिति गंभीर साबित हो सकती है। इससे न केवल तेल, बल्कि अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित होगी, जिसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इससे पहले, यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन ने संकेत दिया था कि यदि अमेरिका और इजरायल ईरान पर दोबारा हमला करते हैं, तो वह अपने सैन्य अभियानों को और तेज करेगा।