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यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन: पुलिस ने कहा सुनियोजित साजिश

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने शर्ट उतारकर प्रदर्शन किया, जिसे पुलिस ने सुनियोजित साजिश करार दिया। इस घटना ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया है, जिसमें कुछ इसे लोकतांत्रिक विरोध मानते हैं, जबकि अन्य इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हैं। पुलिस ने आरोपियों की पहचान की है और कहा है कि यह घटना बाहरी फंडिंग से प्रेरित हो सकती है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी।
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यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन: पुलिस ने कहा सुनियोजित साजिश

नई दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट पर प्रदर्शन


नई दिल्ली: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान, यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने शर्ट उतारकर विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद, पुलिस ने इन कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। जांच के बाद, पुलिस ने इसे एक सुनियोजित साजिश बताया है।


पुलिस का कहना है कि यह घटना देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास था। समिट में प्रदर्शनकारियों ने सरकार और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ नारेबाजी की, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया।


पुलिस ने मामले की जानकारी दी

पटियाला हाउस कोर्ट ने शनिवार को इन आरोपियों को पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया। इस मामले पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कुछ इसे लोकतांत्रिक विरोध मानते हैं, जबकि अन्य इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देख रहे हैं। समिट के एग्जीबिशन हॉल में अचानक तनाव फैल गया जब आईवाईसी के कार्यकर्ता बिना शर्ट के नजर आए। उन्होंने 'पीएम मोदी कॉम्प्रोमाइज्ड हैं' लिखी टी-शर्टें लहराईं और सरकार विरोधी नारे लगाए।


पुलिस के गंभीर आरोप अदालत में

दिल्ली पुलिस ने अदालत में कहा कि यह केवल एक विरोध नहीं, बल्कि एक गहरी साजिश थी। जांच अधिकारी ने बताया कि चारों आरोपी विभिन्न स्थानों से आए थे और उन्होंने मिलकर टी-शर्टें प्रिंट करवाईं। पुलिस को संदेह है कि इस घटना के पीछे बाहरी फंडिंग हो सकती है, इसलिए आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त करने की आवश्यकता है। कुछ अन्य आरोपी मौके से फरार हो गए हैं, जिन्हें पकड़ने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है।


पुलिस ने पांच दिनों की रिमांड मांगी, ताकि साजिश के सभी पहलुओं की जांच की जा सके। जब कोर्ट ने रिमांड की अवधि पर सवाल उठाया, तो पुलिस ने घटना की गंभीरता और फरार आरोपियों का हवाला दिया। आरोपियों के वकील ने कोर्ट में कहा कि यह एक शांतिपूर्ण विरोध था, जो लोकतंत्र में हर नागरिक का अधिकार है।