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यूपी में भूजल की गुणवत्ता पर गंभीर चिंता: रिपोर्ट में यूरेनियम और अन्य तत्वों का पता चला

उत्तर प्रदेश में भूजल की गुणवत्ता पर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। CSIR-IITR द्वारा जारी आंकड़ों में कई जिलों में पीने के पानी में हानिकारक तत्वों जैसे फ्लोराइड, आर्सेनिक और यूरेनियम की मात्रा मानकों से अधिक पाई गई है। अलीगढ़ सहित 11 जिलों में लवणता और अन्य तत्वों की अधिकता ने स्थिति को चिंताजनक बना दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और औद्योगिक अपशिष्ट के कारण जल संकट बढ़ सकता है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
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यूपी में भूजल की गुणवत्ता पर गंभीर चिंता: रिपोर्ट में यूरेनियम और अन्य तत्वों का पता चला

भूजल की गुणवत्ता पर चौंकाने वाले आंकड़े

अलीगढ़। उत्तर प्रदेश में भूजल की गुणवत्ता पर CSIR-IITR द्वारा जारी रिपोर्ट ने गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कई जिलों में पीने के पानी में फ्लोराइड, आर्सेनिक, नाइट्रेट और यहां तक कि यूरेनियम जैसे हानिकारक तत्वों की मात्रा मानकों से अधिक पाई गई है। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और भारतीय विष विज्ञान संस्थान अनुसंधान (IITR) के अनुसार, अलीगढ़ सहित 11 जिलों में लवणता, 24 जिलों में फ्लोराइड और 14 जिलों में आर्सेनिक की मात्रा मानक से अधिक है।


यूरेनियम की उपस्थिति से स्थिति और गंभीर

वाराणसी, सोनभद्र, अमरोहा और उन्नाव समेत 22 जिलों में यूरेनियम के अंश मिलने से स्थिति और बिगड़ गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 48 जिलों में नाइट्रेट और 46 जिलों में आयरन की अधिकता पाई गई है, जबकि 26 जिलों में मैगनीज भी मानक से ऊपर है। बदायूं और चंदौली में सीसा भी सीमा के करीब पहुंच गया है। संसद में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में भूजल की वास्तविक समय निगरानी और प्रबंधन से संबंधित रिपोर्ट पेश की है।


भूजल की स्थिति में सुधार, लेकिन गुणवत्ता पर सवाल

केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 2017 के 69.92 अरब घन मीटर से बढ़कर 2025 में 73.39 अरब घन मीटर हो गया है। हालांकि, भूजल का उपयोग चिंताजनक स्तर पर बना हुआ है। 2017 में 70.18 फीसदी के मुकाबले 2025 में भूजल उपयोग 70 फीसदी पर है। इसका मतलब है कि पानी की मात्रा बढ़ी है, लेकिन उसकी गुणवत्ता और सुरक्षित उपलब्धता पर सवाल उठते हैं।


अलीगढ़ में जल संकट की संभावना

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अहमद मुज्तबा सिद्दीकी ने बताया कि जलवायु परिवर्तन, औद्योगिक अपशिष्ट और भारी धातुएं भूजल को तेजी से दूषित कर रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो 2050 तक शुद्ध पेयजल का गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।


औद्योगिक क्षेत्रों का दबाव

सीएसआईआर-नीरी के मूल्यांकन में मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, आगरा और मथुरा के औद्योगिक क्षेत्रों के पास भूजल के नमूनों की जांच की गई। यमुना और हिंडन नदी के किनारे लिए गए बोरवेल नमूनों में भारी धातुओं की मौजूदगी दर्ज की गई, हालांकि ये बीआईएस मानकों के भीतर पाई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक अपशिष्ट और शहरी विस्तार का दबाव भूजल की गुणवत्ता को लगातार प्रभावित कर रहा है।