Newzfatafatlogo

योगी सरकार ने जल जीवन मिशन में लापरवाही पर 26 इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई की

योगी सरकार ने जल जीवन मिशन में लापरवाही के चलते 26 इंजीनियरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में 12 इंजीनियरों को निलंबित किया गया है, जबकि चार के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है। यह कदम उन शिकायतों के बाद उठाया गया है, जिनमें पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों की खराब स्थिति का जिक्र किया गया था। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ जल की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की लापरवाही सहन नहीं की जाएगी।
 | 
योगी सरकार ने जल जीवन मिशन में लापरवाही पर 26 इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई की

योगी सरकार का बड़ा कदम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन योजना में लापरवाही के चलते योगी सरकार ने कठोर कदम उठाए हैं। इस कार्रवाई में 26 इंजीनियरों और कर्मचारियों को निशाना बनाया गया है, जिनमें से 12 को निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है। यह कदम उन शिकायतों के बाद उठाया गया है, जिनमें जल जीवन मिशन के कार्यों की गुणवत्ता और पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों की खराब स्थिति का जिक्र किया गया था। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ जल की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की लापरवाही सहन नहीं की जाएगी।


अपर मुख्य सचिव का अल्टीमेटम

अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने चेतावनी दी है कि कार्यशैली में सुधार नहीं होने पर बर्खास्तगी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, चार इंजीनियरों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है और तीन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। शिकायतों के आधार पर सात इंजीनियरों का तबादला भी किया गया है।


निलंबित इंजीनियरों की सूची

जानें कहां-कहां के इंजीनियर हुए निलंबित

निलंबित इंजीनियरों में लखीमपुर खीरी के एक्सईएन अविनाश गुप्ता, जौनपुर के अधिशासी अभियंता सौमित्र श्रीवास्तव, गाजीपुर के एक्सईएन मो. कासिम हाशमी, चंदौली के कार्यवाहक अधिशासी अभियंता अमित राजपूत, चंदौली के सहायक अभियंता सीताराम यादव, बिजनौर के एई अकबर हसन, औरैया के जेई अनुराग गोयल, हाथरस के कुलदीप कुमार सिंह, आजमगढ़ के राजेन्द्र कुमार यादव, बरेली के रूप चन्द्र, बाराबंकी के जूनियर इंजीनियर अवनीश प्रताप सिंह, कुशीनगर के कार्यवाहक खंडीय लेखाकार धर्मप्रकाश महेश्वरी शामिल हैं।


भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख

सरकार को कई शिकायतें मिली थीं, जिनमें काम पूरा दिखाकर भुगतान लेने की कोशिश की गई थी, जबकि वास्तविकता में काम अधूरा था। जल जीवन मिशन केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है, जिसका उद्देश्य हर घर तक साफ पानी पहुंचाना है। लेकिन कई स्थानों पर पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों की मरम्मत नहीं की गई, जिससे जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जो भी अधिकारी इस मिशन में लापरवाही करेगा, उसे बर्खास्तगी जैसे कठोर कदमों का सामना करना पड़ सकता है।


मंत्री और विधायक के बीच विवाद

मंत्री और विधायक के बीच विवाद के बाद जागी सरकार

इस प्रशासनिक कार्रवाई के पीछे महोबा का एक विवाद भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 30 जनवरी को महोबा के चरखारी में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के काफिले को भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत ने रोककर पाइपलाइन के बाद खराब पड़ी सड़कों का मुद्दा उठाया था। इस बहस ने सिस्टम की कमियों को उजागर किया और मामला पार्टी स्तर तक पहुंच गया। विधायक का आरोप था कि जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन डालने के बाद सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई, जिससे जनता को परेशानी हो रही है। इस मुद्दे पर दोनों के बीच तीखी बहस हुई, जो बाद में सुर्खियों में आ गई। इसके बाद सरकार ने पूरे प्रदेश में जांच के आदेश दिए और उन सभी इंजीनियरों को चिन्हित किया जो अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहे थे।


जल जीवन मिशन का उद्देश्य

जल जीवन मिशन का लक्ष्य हर ग्रामीण घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, लेकिन कई जगहों पर जमीनी हकीकत इस लक्ष्य से भटकती नजर आई। शिकायतों में यह भी सामने आया कि काम पूरा दिखाकर भुगतान लिया गया, जबकि वास्तविक स्थिति कुछ और थी। ऐसे मामलों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।