रवि योग: सूर्य देव की पूजा से प्राप्त करें सुख और समृद्धि
सूर्य देव की आराधना का महत्व
नई दिल्ली: सनातन धर्म में सूर्य देव की पूजा का विशेष स्थान है। सूर्य आत्मा के प्रतीक, नवग्रहों के राजा और प्रत्यक्ष देवता माने जाते हैं। उनकी नियमित आराधना से व्यक्ति को स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, पराक्रम, सम्मान और समृद्धि प्राप्त होती है। इसके अलावा, कुंडली के दोष भी दूर होते हैं और करियर में उन्नति होती है। विशेष रूप से, रवि योग के दौरान सूर्य देव की पूजा अत्यंत फलदायी होती है। इस शुभ योग में अर्घ्य, मंत्र जाप, आदित्य हृदय स्तोत्र या 'ओम घृणि सूर्याय नमः' का जाप करने से सूर्य की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है, जिससे सुख-शांति और उच्च पद की प्राप्ति होती है।
पंचांग के अनुसार तिथियाँ और समय
दृक पंचांग के अनुसार, 8 जनवरी को षष्ठी तिथि सुबह 7:05 बजे तक रहेगी, इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू होगी। यदि कोई शुभ कार्य करना चाहते हैं, तो राहुकाल का समय ध्यान में रखना आवश्यक है। इस दौरान कोई महत्वपूर्ण कार्य नहीं करना चाहिए। राहुकाल दोपहर 1:46 बजे से 3:04 बजे तक रहेगा। चंद्रमा पूरे दिन सिंह राशि में गोचर करेंगे। सूर्योदय सुबह 7:15 बजे और सूर्यास्त शाम 5:41 बजे होगा।
रवि योग का महत्व
पंचांग में रवि योग एक विशेष शुभ संयोग माना जाता है। यह सूर्य और चंद्रमा के योग से बनता है। जब चंद्रमा सूर्य से चौथे, छठे, नौवें या दसवें स्थान पर होता है, तब यह योग बनता है। विशेष रूप से, यदि सूर्य अश्विनी नक्षत्र में हो और चंद्रमा रोहिणी (चौथा), आर्द्रा (छठा), आश्लेषा (नौवां) या मघा (दसवां) नक्षत्र में हो, तो यह योग बनता है। रवि योग में किए गए कार्य जल्दी फल देते हैं और सफल होते हैं। इस मुहूर्त में सूर्य देव की आराधना से सुख, समृद्धि और सम्मान मिलता है।
शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय
यह समय कई शुभ कार्यों के लिए अत्यंत अनुकूल है। घर में नई कार लाने, प्रॉपर्टी का सौदा पक्का करने, कार बुकिंग कराने, दुकान का उद्घाटन करने, गृह प्रवेश करने या किसी नए बिजनेस की शुरुआत करने के लिए रवि योग शुभ माना जाता है। ऐसे कार्यों से लंबे समय तक लाभ मिलता है।
भद्रा काल का ध्यान रखें
भद्रा काल को अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान महत्वपूर्ण कार्य जैसे विवाह, मुंडन, नामकरण या नए निवेश नहीं करने चाहिए। भद्रा में शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं। रवि योग में सूर्य देव को जल अर्पित कर पाठ करना चाहिए। धर्म शास्त्र के अनुसार, तांबे के लोटे में जल, रोली, गुड़, अक्षत डालकर जल देना चाहिए। इस दौरान ओम घृणि सूर्याय नम: का जप कर धूप-दीप जलाना चाहिए।
