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राघव चड्ढा बने डिलीवरी बॉय, गिग वर्कर्स के मुद्दों को समझने के लिए उतरे मैदान में

आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स के मुद्दों को समझने के लिए खुद को डिलीवरी बॉय के रूप में पेश किया। उन्होंने Zomato, Blinkit, और अन्य कंपनियों के डिलीवरी राइडर्स की समस्याओं को समझने के लिए उनके साथ काम किया। चड्ढा ने गिग वर्कर्स की हड़ताल का समर्थन किया और उनकी मांगों को संसद में उठाया। जानें उनके अनुभव और गिग वर्कर्स की प्रमुख मांगें क्या हैं।
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राघव चड्ढा बने डिलीवरी बॉय, गिग वर्कर्स के मुद्दों को समझने के लिए उतरे मैदान में

राघव चड्ढा का अनोखा अनुभव

राघव चड्ढा बने डिलीवरी बॉय: आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स के मुद्दों को उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उन्होंने संसद से लेकर कंपनियों के मालिकों तक उनकी समस्याओं को पहुंचाने का प्रयास किया है। हाल ही में, राघव चड्ढा ने Zomato, Blinkit, Swiggy, और Zepto जैसे डिलीवरी राइडर्स की कठिनाइयों को समझने के लिए खुद को डिलीवरी बॉय के रूप में पेश किया और बाइक से सामान वितरित किया।



गिग वर्कर्स ने 31 दिसंबर को अपनी मांगों को लेकर एक देशव्यापी हड़ताल का आयोजन किया था। उनकी मांगों में डिलीवरी सेवा में 10 मिनट की समय सीमा को हटाना, वेतन में वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा (जैसे पेंशन और बीमा), काम के घंटे निर्धारित करना, कार्यस्थल पर सम्मान और मनमाने तरीके से आईडी ब्लॉक न करने जैसी बातें शामिल थीं। राघव चड्ढा ने इस हड़ताल का समर्थन किया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें वह Blinkit डिलीवरी बॉय के रूप में सामान वितरित करते हुए दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने लिखा, 'बोर्डरूम से दूर, ज़मीनी स्तर पर। मैंने उनका दिन जिया। बने रहें!'


सांसद ने शीतकालीन सत्र के दौरान गिग वर्कर्स की चुनौतियों को राज्यसभा में उठाया था। उन्होंने गिग वर्कर्स की हड़ताल के दौरान एक पोस्ट में लिखा, 'आज, गिग वर्कर्स ने अपनी शिकायतों को उजागर करने के लिए हड़ताल की घोषणा की है। मैंने इस महीने की शुरुआत में संसद में उनके मुद्दे उठाए थे, और प्लेटफार्मों से जिम्मेदार बातचीत की उम्मीद की थी। मैं ब्लिंकिट, ज़ेप्टो और अन्य कंपनियों के प्रबंधन से तुरंत हस्तक्षेप करने, बातचीत करने और सही, मानवीय समाधान निकालने का आग्रह करता हूं। भारत की प्रगति डर और शोषण पर नहीं चल सकती, बल्कि यह सम्मान और न्याय पर आधारित होनी चाहिए।'