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राजस्थान में जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी

राजस्थान में जल जीवन मिशन से जुड़े 20 हजार करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी को एंटी करप्शन ब्यूरो ने गिरफ्तार किया है। जांच में फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए टेंडर हासिल करने और नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं। एसीबी ने पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और आगे की कार्रवाई के बारे में।
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राजस्थान में जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी

महेश जोशी की गिरफ्तारी

जयपुर। जल जीवन मिशन से जुड़े 20 हजार करोड़ रुपये के कथित टेंडर घोटाले में राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। एसीबी की विशेष जांच टीम (SIT) ने गहलोत सरकार के पूर्व पीएचईडी मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार किया है। उन्हें गुरुवार सुबह लगभग साढ़े चार बजे जयपुर स्थित उनके निवास से हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। एसीबी के अनुसार, महेश जोशी से पूछताछ और जांच का कार्य जारी है।


भ्रष्टाचार के संकेत

जांच एजेंसी ने बताया कि यह कार्रवाई जल जीवन मिशन में व्यापक भ्रष्टाचार के आरोपों के आधार पर की गई है। प्रारंभिक जांच में मिलीभगत और नियमों के उल्लंघन के संकेत मिले हैं। इसी संदर्भ में पूर्व मंत्री को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। एसीबी ने पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।


फर्जी प्रमाणपत्रों का मामला

जांच में खुलासा: फर्जी प्रमाणपत्रों से 960 करोड़ के टेंडर लेने का आरोप

जांच में यह सामने आया है कि महेश मित्तल और पदमचंद जैन ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र तैयार किए। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर राजस्थान में विभिन्न टेंडर हासिल किए गए। एसीबी के अनुसार, महेश जोशी और अन्य अधिकारियों ने इन फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए लगभग 960 करोड़ रुपये के टेंडर दिलाने में मदद की। जांच में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार की आशंका जताई गई है।


टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं

नियम बदलकर टेंडर प्रक्रिया में ‘टेंडर पुलिंग’ का आरोप

जांच में यह भी सामने आया कि 50 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े प्रोजेक्ट्स की निविदाओं में साइट विजिट प्रमाणपत्र की अनिवार्यता को नियमों के विपरीत शामिल किया गया। इससे बोली लगाने वालों की पहचान उजागर हो जाती थी और टेंडर पुलिंग संभव हो पाती थी। एसीबी के अनुसार, इस प्रक्रिया के कारण 30 से 40 प्रतिशत तक अप्रत्याशित ऊंचा टेंडर प्रीमियम मिला, जिसे विभागीय अधिकारियों ने मंजूरी दी।


गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई

पहले 11 आरोपी गिरफ्तार, तीन फरार घोषित

एसीबी के अनुसार, इस मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और अन्य अधिकारी शामिल हैं। तीन फरार आरोपियों के खिलाफ अदालत ने स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में पांच अन्य आरोपियों को गिरफ्तारी से राहत प्रदान की है। एसीबी ने महेश जोशी को अदालत में पेश करने के बाद 11 मई 2026 तक रिमांड मंजूर किया है और आगे की पूछताछ जारी रहेगी।