राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा
आसाराम की सजा पर हाईकोर्ट का निर्णय
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ ने बुधवार को आसाराम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए नाबालिग के यौन उत्पीड़न के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की बेंच ने यह निर्णय लिया। इस मामले में सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को अदालत ने बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने 20 अप्रैल को सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था। अब आसाराम को अंतरिम जमानत के बाद सरेंडर करना होगा।
दुष्कर्म के आरोपों की विश्वसनीयता
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता द्वारा लगाए गए दुष्कर्म के आरोप विश्वसनीय हैं और पर्याप्त साक्ष्यों से समर्थित हैं। इसी आधार पर अदालत ने धारा 376 आईपीसी के तहत आसाराम की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। फैसले के बाद आसाराम को जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर करना होगा।
सुनवाई में तर्कों का आदान-प्रदान
इस मामले में हाईकोर्ट में 16 फरवरी से 20 अप्रैल 2026 तक लगातार सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि मामला मनगढ़ंत है और पीड़िता के माता-पिता के बयानों में विरोधाभास हैं। वकीलों ने यह भी कहा कि घटना की रात आसाराम और पीड़िता के बीच कॉल रिकॉर्ड नहीं है।
अभियोजन पक्ष का तर्क
वहीं, अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के बयान को पर्याप्त बताया और कहा कि पॉक्सो मामलों में एकल बयान भी दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त होता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पीड़िता के बयान को कानून में विशेष महत्व दिया गया है। अभियोजन ने यह भी कहा कि गवाहों पर हमले इस बात का संकेत हैं कि साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी।
फैसले का महत्व
फैसले के बाद पीड़िता के अधिवक्ता पी.सी. सोलंकी ने कहा कि अदालत ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर गंभीरता से विचार किया और न्यायसंगत फैसला सुनाया।
2018 में ट्रायल कोर्ट का फैसला
यह उल्लेखनीय है कि 25 अप्रैल 2018 को जोधपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने आसाराम को नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रभर की सजा सुनाई थी। सह-आरोपियों शरद और शिल्पी को भी 20-20 साल की सजा दी गई थी। सभी आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में अपील की थी।
मामला देशभर में चर्चित
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब एक नाबालिग लड़की ने आरोप लगाया कि धार्मिक उपचार के बहाने उसे आश्रम बुलाया गया, जहां उसके साथ यौन शोषण और दुष्कर्म किया गया। पुलिस जांच, मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने आसाराम को दोषी ठहराया था।
