राज्यसभा चुनाव में शरद पवार और अन्य उम्मीदवार निर्विरोध चुने जाएंगे
राज्यसभा चुनाव की अनोखी स्थिति
मुंबई: भारतीय राजनीति में अक्सर बड़े बदलाव होते हैं, जहां सत्ता एक पल में एक पार्टी से दूसरी पार्टी में चली जाती है। महाराष्ट्र में ऐसे कई उदाहरण देखने को मिले हैं। लेकिन इस बार राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Elections) में एक अलग स्थिति देखने को मिल रही है। सात सीटों के लिए केवल सात उम्मीदवारों ने नामांकन भरा है। इस प्रकार, 85 वर्षीय शरद पवार (Sharad Pawar) सहित कई प्रमुख नेता बिना चुनाव लड़े ही संसद के उच्च सदन में अपनी जगह सुनिश्चित कर चुके हैं।
महाराष्ट्र में 16 मार्च को राज्यसभा की सात सीटों के लिए चुनाव होना था। नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च थी। आमतौर पर, राजनीतिक जोड़-तोड़ और क्रॉस-वोटिंग के डर से अधिक उम्मीदवार खड़े किए जाते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। 7 सीटों के लिए केवल 7 नेता ही नामांकन पत्र दाखिल कर पाए हैं। जब उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर हो, तो चुनाव में मतदान की आवश्यकता नहीं रह जाती। इस स्थिति में सभी सात उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना केवल एक औपचारिकता बनकर रह गया है।
सुप्रिया सुले ने किया नामांकन
विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (MVA) की ओर से केवल एक उम्मीदवार हैं, जो कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक शरद पवार (Sharad Pawar) हैं। 85 वर्षीय पवार अपने स्वास्थ्य कारणों से व्यक्तिगत रूप से नामांकन दाखिल करने नहीं आ सके। उनकी अनुपस्थिति में, उनकी बेटी और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने उनके लिए नामांकन पत्र भरा। स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद, पवार का राजनीतिक प्रभाव उन्हें एक बार फिर निर्विरोध राज्यसभा में पहुंचा रहा है।
वहीं, सत्ताधारी महायुति (Mahayuti) गठबंधन ने अपनी सभी 6 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामांकन पत्र भरे हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) के प्रमुख रामदास आठवले और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े शामिल हैं। ये दोनों नेता भी बिना किसी चुनावी तनाव के राज्यसभा में प्रवेश के लिए तैयार हैं।
