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राबड़ी देवी ने सरकारी आवास खाली करने से किया इनकार, सियासत गरमाई

बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने अपने सरकारी आवास को खाली करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती दी है कि यदि सरकार चाहती है, तो वह बल का प्रयोग कर सकती है। यह विवाद बिहार की राजनीति में एक नई हलचल का कारण बन गया है। राबड़ी देवी का यह आवास लंबे समय से उनके पास है और अब इसे मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित किया गया है। जानें इस राजनीतिक विवाद के पीछे की पूरी कहानी।
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राबड़ी देवी ने सरकारी आवास खाली करने से किया इनकार, सियासत गरमाई

राबड़ी देवी का आवास विवाद


बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद सरकारी आवासों का पुनः आवंटन किया गया है, जिसके चलते राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने शनिवार को अपने सरकारी आवास को खाली करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने 10 सर्कुलर रोड को खाली करने के आदेश को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।


राबड़ी देवी ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि वे आवास नहीं छोड़ेंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार चाहती है, तो वह पुलिस बल का सहारा ले सकती है। उन्होंने यह भी कहा, "वे अभी नए मुख्यमंत्री बने हैं। अगर वे चाहें, तो बल का प्रयोग कर आवास खाली करवा सकते हैं। हम इसे नहीं छोड़ेंगे।"


10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला लंबे समय से राबड़ी देवी के पास है। नई सरकार ने इसे मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया है। भवन निर्माण विभाग ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी किया है, जिसमें नए वीवीआईपी नेमप्लेट लगाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है, जो औपचारिक हस्तांतरण का संकेत है।


इससे पहले, विभाग ने राबड़ी देवी को आधिकारिक नोटिस जारी कर 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास खाली करने का निर्देश दिया था। यह बंगला बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और वर्षों तक यह पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी से जुड़ा रहा है।


राज्य सरकार ने राबड़ी देवी को पटना के हार्डिंग रोड इलाके में नया सरकारी बंगला आवंटित किया है, जो पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाली सुविधाओं और सुरक्षा के अनुरूप तैयार किया गया है।


भवन निर्माण विभाग के सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय पूरी तरह से प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और सरकारी आवास आवंटन से जुड़े नियमों के अनुसार लिया गया है।