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रामपाल बाबा की रिहाई: 11 साल बाद मिली आज़ादी, गांव की ओर बढ़े

रामपाल बाबा, जो खुद को भगवान मानते हैं, 11 साल और 5 महीने जेल में बिताने के बाद रिहा हो गए हैं। उन्हें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय से जमानत मिली। उनके परिवार के सदस्य उन्हें लेने के लिए जेल के बाहर मौजूद थे। रामपाल की कानूनी लड़ाई 2006 में शुरू हुई थी, जब उनके आश्रम में हिंसा भड़क गई थी। जानें उनके विवादों, आश्रमों और अनुयायियों के बारे में इस लेख में।
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रामपाल बाबा की रिहाई: 11 साल बाद मिली आज़ादी, गांव की ओर बढ़े

रामपाल बाबा की रिहाई


रामपाल, जो खुद को भगवान मानते हैं, शुक्रवार को 11 साल और 5 महीने की जेल की सजा पूरी करने के बाद बाहर आए। उन्हें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद रिहा किया गया।


उनके परिवार के सदस्य उन्हें लेने के लिए हिसार जेल के बाहर मौजूद थे। इसके बाद, वह एक सफेद डिफेंडर SUV में बैठकर अपने पैतृक गांव सोनीपत (धनाना) की ओर रवाना हुए। जेल के बाहर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था और बैरिकेडिंग की गई थी।


रामपाल के वकील सचिन दास ने पहले ही दिन में 1-1 लाख रुपये के बॉंड जमा करके जमानत की औपचारिकताएँ पूरी कर ली थीं। उन्हें शाम 5:05 बजे आधिकारिक रूप से रिहा किया गया।


कानूनी लड़ाई का सफर

रामपाल की कानूनी समस्याएँ 12 जुलाई, 2006 को शुरू हुईं, जब रोहतक में उनके आश्रम में हिंसा भड़क गई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 2008 में जमानत मिलने से पहले उन्होंने लगभग दो साल जेल में बिताए।


हालांकि, 2014 में विवाद तब बढ़ गया जब रामपाल उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद पेश नहीं हुए। पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया, लेकिन उन्होंने अपने समर्थकों की 'मानव ढाल' बनाकर इसका विरोध किया।


नवंबर 2014 में पुलिस और उनके समर्थकों के बीच 10 दिनों तक टकराव हुआ, जो हिंसक हो गया। जब अधिकारियों ने आश्रम पर धावा बोला, तो छह लोगों की जान चली गई। रामपाल को 19 नवंबर, 2014 को गिरफ्तार किया गया।


कई मामलों में राहत

रामपाल पर हत्या और राजद्रोह सहित 14 FIR दर्ज थीं। समय के साथ, उन्हें कुछ मामलों में बरी कर दिया गया है।


अन्य मामलों में उन्हें जमानत मिल गई है। दो हत्या के मामलों में उनकी आजीवन कारावास की सजा को उच्च न्यायालय ने रोक दिया है, और फिलहाल, उन्हें 14 में से 11 मामलों में राहत मिल चुकी है।


गॉडमैन बनने की यात्रा

78 वर्षीय रामपाल ने आध्यात्मिकता की राह पर चलने से पहले हरियाणा सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के रूप में काम किया। 1995 में, उन्होंने सतलोक आश्रम की स्थापना की और कबीर पंथ के नेता के रूप में उपदेश देना शुरू किया।


उन्होंने हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और नेपाल में बड़ी संख्या में अनुयायी बनाए, लेकिन आर्य समाज के खिलाफ अपनी टिप्पणियों के कारण विवादों में भी रहे।


आश्रमों का नेटवर्क

खबरों के अनुसार, रामपाल के पूरे भारत में लगभग 15 आश्रम हैं, जिनमें प्रमुख केंद्र शामिल हैं:


हिसार (बरवाला)
रोहतक (करोथा)
जींद (धनाना)
भिवानी


बरवाला आश्रम अभी भी अदालत की निगरानी में है, और एक दशक से अधिक समय से पुलिस इसकी सुरक्षा कर रही है।