रामायण के सुंदरकांड से जीवन की कठिनाइयों का सामना कैसे करें

रामायण का सुंदरकांड: एक मार्गदर्शक ग्रंथ
रामायण का सुंदरकांड केवल एक कथा नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन को सही दिशा में ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें हर चौपाई में जीवन की कठिनाइयों का समाधान छिपा है। आज हम एक विशेष चौपाई पर चर्चा करेंगे, जो हमें सिखाती है कि जब सभी रास्ते बंद नजर आएं, तो हमें क्या करना चाहिए। यह चौपाई है: "करि जतन भट कोटिन्ह बिकट तन नगर चहुँ दिसि रच्छहीं।"इस चौपाई का अर्थ सरल भाषा में समझते हैं। जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि लंका की सुरक्षा बहुत मजबूत थी। करोड़ों भयानक योद्धा नगर की चारों दिशाओं में तैनात थे। लंका में प्रवेश करना तो दूर, उसके बारे में सोचना भी असंभव था।
यह स्थिति हमारे जीवन में भी कई बार आती है। जब हम कोई नया कार्य आरंभ करते हैं या किसी बड़ी समस्या में फंस जाते हैं, तो ऐसा लगता है कि चारों ओर से रास्ते बंद हो गए हैं। समस्याएँ उन राक्षसों की तरह होती हैं, जो हमें आगे बढ़ने नहीं देतीं।
हनुमान जी ने हमें क्या सिखाया? ऐसी कठिनाई में उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने धैर्य रखा: लंका के विशाल रूप को देखकर घबराए नहीं, बल्कि शांति से स्थिति का आकलन किया।
बुद्धि का उपयोग किया: उन्होंने छोटा रूप धारण किया और बिना किसी की नजर में आए लंका में प्रवेश किया। यह दर्शाता है कि ताकत से ज्यादा बुद्धि का सही उपयोग आवश्यक है।
भगवान पर विश्वास रखा: उनके मन में अपने प्रभु श्री राम का नाम था। इसी विश्वास ने उन्हें इतनी बड़ी चुनौती का सामना करने की हिम्मत दी।
यह चौपाई हमें यही सिखाती है कि जीवन में कठिनाइयाँ कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर हम धैर्य, बुद्धि और ईश्वर पर विश्वास के साथ आगे बढ़ें, तो कोई भी बाधा हमें रोक नहीं सकती। अगली बार जब आप किसी कठिनाई में हों, तो सुंदरकांड की इस चौपाई और हनुमान जी के साहसिक कदम को अवश्य याद करें।