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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का शिमला प्रवास: गर्मियों में राष्ट्रपति भवन की परंपरा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिमला में अपने ग्रीष्मकालीन प्रवास की शुरुआत की है। यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है, जब शिमला को ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में स्थापित किया गया था। राष्ट्रपति भवन रिट्रीट, जो मशोबरा में स्थित है, का निर्माण 1850 में हुआ था और यह पारंपरिक धज्जी शैली में बना है। इस भवन में राष्ट्रपति के जीवन से जुड़ी कई चीजें देखने को मिलती हैं। जानें इस भवन की विशेषताएँ और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का शिमला प्रवास: गर्मियों में राष्ट्रपति भवन की परंपरा

राष्ट्रपति का शिमला दौरा

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने ग्रीष्मकालीन प्रवास के लिए पहुंच गई हैं। उनका स्वागत हिमाचल के गवर्नर कविंदर गुप्ता, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने किया। राष्ट्रपति 6 दिनों तक शिमला से लगभग 13 किलोमीटर दूर मशोबरा में स्थित राष्ट्रपति भवन रिट्रीट में ठहरेंगी। यह स्थान गर्मियों में राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास होता है, जहां से वे अपने कार्यालय के कार्यों का संचालन करेंगी। यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है।


ब्रिटिश काल की परंपरा

अंग्रेजों ने शिमला को भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में स्थापित किया था। तब से हर गर्मी में अंग्रेजों का प्रशासन दिल्ली से शिमला स्थानांतरित हो जाता था। शिमला का ठंडा मौसम और पहाड़ी वातावरण इसे गर्मियों में अंग्रेजों की पहली पसंद बनाता था।


परंपरा की शुरुआत

1947 में स्वतंत्रता के बाद, शिमला में कई पुरानी इमारतें भारत सरकार के अधीन आ गईं। मौजूदा राष्ट्रपति भवन भी एक ऐसी इमारत थी, जिसका उपयोग ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा किया जाता था। गर्मियों में प्रशासन का सारा काम शिमला से ही होता है। 1947 के बाद भी यह परंपरा जारी रही, और 1965 में तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वेपल्ली राधाकृष्णन ने इसे राष्ट्रपति का आधिकारिक ग्रीष्मकालीन रिट्रीट घोषित किया। तब से हर साल राष्ट्रपति का शिमला आना एक निश्चित परंपरा बन गया है।


रिट्रीट भवन की विशेषताएँ

राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास, जिसे रिट्रीट भवन के नाम से जाना जाता है, शिमला से कुछ दूर मशोबरा की पहाड़ी पर स्थित है। इसकी दूरी शिमला से केवल 15 किलोमीटर है। यह भवन 1850 में बनाया गया था और इसकी ऊंचाई 8,000 फीट है। यह लकड़ी से निर्मित है और इसका क्षेत्रफल लगभग 10,628 वर्ग फीट है.


भवन का निर्माण

इस भवन का निर्माण लॉर्ड विलियम ने कोटि के राजा से जमीन लीज पर लेकर किया था। राजा ने कुछ शर्तें रखी थीं, जैसे कि शिमला और मशोबरा गांव से दो सड़कें जनता के लिए खुली रखी जाएं और कोई पेड़ न काटा जाए। 1886 में राजा ने जमीन वापस ले ली, लेकिन 1895 में वायसराय ने इसे फिर से अपने अधीन कर लिया। आजादी के बाद, इस भवन को राष्ट्रपति के ग्रीष्मकालीन निवास के रूप में मान्यता मिली।


भवन की विशेषताएँ

यह भवन देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित है। यहां राष्ट्रपति के जीवन से जुड़ी कई चीजें देखने को मिलती हैं। भवन का निर्माण पारंपरिक धज्जी शैली में किया गया है, जो भूकंप के झटकों को सहन करने में सक्षम होती है। वर्तमान में, इस भवन में दो मंजिलें हैं, जिसमें राष्ट्रपति और उनके परिवार के लिए छह कमरे हैं। इसके अलावा, एक शानदार डाउनिंग रूम भी है, जिसमें 20 लोगों के बैठने की व्यवस्था है।


राष्ट्रपति का कमरा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का शिमला प्रवास: गर्मियों में राष्ट्रपति भवन की परंपरा
शिमला में राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास


राष्ट्रपति का कमरा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का शिमला प्रवास: गर्मियों में राष्ट्रपति भवन की परंपरा
राष्ट्रपति का कमरा