राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे से पहले मथुरा में बंदरों की शरारतें बढ़ीं
मथुरा में बंदरों की शरारतें प्रशासन के लिए चुनौती
मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृंदावन में चश्मा और अन्य सामान चुराने वाले बंदरों की हरकतें आम हैं, लेकिन इस बार इन 'चश्मा चोर' बंदरों ने जिला प्रशासन को चिंता में डाल दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रस्तावित वीवीआईपी दौरे के मद्देनजर, प्रशासन इन शातिर बंदरों से निपटने के लिए विशेष उपाय कर रहा है।
चश्मा चुराने वाले बंदरों का अनोखा तरीका
वृंदावन के मंदिरों और बाजारों में सक्रिय ये बंदर विशेष रूप से चश्मा पहनने वाले श्रद्धालुओं को निशाना बनाते हैं। ये झपट्टा मारकर चश्मा छीन लेते हैं और उसे तब तक नहीं लौटाते जब तक उन्हें खाने-पीने की चीजें, खासकर फ्रूटी का पैकेट नहीं दिया जाता। यह अनोखी 'डील' यहां की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। राष्ट्रपति का तीन दिवसीय दौरा 19 मार्च से शुरू होगा, जिसमें वे उड़िया बाबा आश्रम और रामकृष्ण मिशन सेवा चैरिटेबल अस्पताल का दौरा करेंगी।
प्रशासन ने लंगूरों के कटआउट्स का किया उपयोग
पहले ऐसे वीवीआईपी दौरों के दौरान बंदरों को भगाने के लिए प्रशिक्षित लंगूरों का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब वन्यजीव संरक्षण कानूनों के कारण यह संभव नहीं है। इस समस्या का समाधान करते हुए, प्रशासन ने राष्ट्रपति के दौरे वाले रास्तों पर लंगूरों के बड़े कटआउट्स लगाने का निर्णय लिया है। माना जाता है कि बंदर लंगूरों से डरते हैं, इसलिए ये कटआउट्स उन्हें उस क्षेत्र से दूर रखेंगे।
वन विभाग की विशेष टीम की तैनाती
बंदरों पर नियंत्रण के लिए केवल कटआउट्स पर निर्भर नहीं रहना है, इसलिए वन विभाग की 30 सदस्यीय विशेष टीम को भी तैनात किया गया है। ये कर्मचारी संवेदनशील क्षेत्रों में गुलेल, लाठी-डंडों और लेजर लाइट्स के साथ मुस्तैद रहेंगे। जहां बंदरों की संख्या अधिक है, वहां अतिरिक्त स्टाफ की ड्यूटी लगाई जाएगी ताकि किसी भी आपात स्थिति का तुरंत समाधान किया जा सके और राष्ट्रपति का दौरा सुरक्षित रूप से संपन्न हो सके।
