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राहुल गांधी ने CBSE परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी पर मोदी सरकार को घेरा

राहुल गांधी ने सीबीएसई 12वीं की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों को लेकर मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र और उनके माता-पिता मानसिक तनाव में हैं। COEMPT नामक कंपनी पर आरोप लगाते हुए उन्होंने स्वतंत्र जांच की मांग की। गांधी ने छात्रों के भविष्य को लेकर उठाए गए सवालों पर भी प्रकाश डाला और शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग की। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी अपनी आवाज उठाई है, जिससे शिक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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राहुल गांधी ने CBSE परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी पर मोदी सरकार को घेरा

CBSE परीक्षा परिणामों में हेरफेर का आरोप


नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सीबीएसई 12वीं की परीक्षाओं के मूल्यांकन में हुई गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि इस 'भयंकर हेरफेर' के कारण लाखों छात्र और उनके अभिभावक मानसिक तनाव में हैं।




राहुल गांधी ने कहा कि मोदी जी हमेशा की तरह न तो जवाब देते हैं, न जिम्मेदारी लेते हैं। जिस कंपनी COEMPT को यह कार्य सौंपा गया, वह पहले Globarena के नाम से विवादों में रही है।


उन्होंने कहा कि नाम बदलने से नीयत नहीं बदलती। यह एक सोचा-समझा षड़यंत्र है। सीबीएसई की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 18.5 लाख छात्रों ने परीक्षा दी, और ओन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) में भारी गड़बड़ियों की शिकायतें आ रही हैं, जिन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।


राहुल गांधी ने कुछ महत्वपूर्ण सवाल उठाए, जैसे कि COEMPT को CBSE का ठेका क्यों दिया गया? क्या नियमों का पालन किया गया? COEMPT के विवादों के बारे में CBSE को क्यों नहीं पता चला? उन्होंने स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की।


उन्होंने कहा कि जब एक 17 वर्षीय छात्र ने अपनी कॉपी की जांच को लेकर मदद मांगी, तो उसे ट्रोल किया गया और 'देशद्रोही' कहा गया।


राहुल गांधी ने कहा कि सीबीएसई की गड़बड़ी से प्रभावित छात्रों का भविष्य अधर में है। ओएसएम और गलत मार्किंग की शिकायतें अनसुनी पड़ी हैं।


उन्होंने कहा कि सीबीएसई की खामियों को उजागर करने वाले छात्रों को एक वर्ग द्वारा पाकिस्तानी बताया गया।


कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि सीबीएसई ने 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' प्रणाली शुरू की थी, जिसने लाखों बच्चों के भविष्य को प्रभावित किया है।


उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के कारण पास प्रतिशत में गिरावट आई है और पूरी प्रक्रिया में अनियमितताएं हैं।


जयराम रमेश ने शिक्षा मंत्री से इस्तीफा मांगते हुए कहा कि उनकी अक्षमता के कारण छात्रों का भविष्य बर्बाद हो रहा है।