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राहुल गांधी ने स्कूल में अपने कैमेस्ट्री टीचर की सराहना की

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुडलूर के थॉमस इंग्लिश हाई स्कूल में बच्चों से बातचीत के दौरान अपने स्कूल के दिनों की यादें साझा कीं। उन्होंने अपने कैमेस्ट्री टीचर की सराहना की, जो परीक्षा की तैयारी में उनकी मदद करती थीं। इसके अलावा, उन्होंने मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में चीन के दबदबे और शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ अपनी राय व्यक्त की। राहुल ने रोजगार के अवसरों की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि युवा पीढ़ी को बेहतर भविष्य मिल सके।
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राहुल गांधी ने स्कूल में अपने कैमेस्ट्री टीचर की सराहना की

राहुल गांधी का स्कूल में अनुभव

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुडलूर के थॉमस इंग्लिश हाई स्कूल में बच्चों से बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें अपने कैमेस्ट्री टीचर बहुत पसंद थे। उन्होंने बताया कि वह परीक्षा की तैयारी में उनकी काफी मदद करती थीं और पढ़ाई में उनकी रुचि बढ़ाने में सहायक थीं। राहुल ने कहा कि स्कूल में वह हमेशा कुछ न कुछ शरारत करते थे।


राहुल ने अपने बोर्डिंग स्कूल के दिनों को याद करते हुए कहा कि वह अपने माता-पिता को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करते थे कि वह खुश नहीं हैं, ताकि वे उनसे मिलने आएं। हालांकि, वह वास्तव में स्कूल में खुश रहते थे। उन्होंने आईटी क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि अब एआई के कारण यह क्षेत्र चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसलिए, हमें मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में भी कदम बढ़ाने की आवश्यकता है।


चीन का मैन्यूफैक्चरिंग में दबदबा

राहुल गांधी ने कहा कि वर्तमान में चीन ने मैन्यूफैक्चरिंग में एक मजबूत स्थिति बना ली है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हम जो भी उपकरण इस्तेमाल करते हैं, जैसे माइक्रोफोन और कैमरे, वे सभी चीन में निर्मित होते हैं। उन्होंने भारत में भी इन उत्पादों का निर्माण करने की आवश्यकता पर जोर दिया और इसके लिए मानसिकता में बदलाव की बात की।


शिक्षा का निजीकरण और महंगाई

राहुल ने शिक्षा के महंगे होने और इसके निजीकरण के खिलाफ अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्राइवेट स्कूल और कॉलेज हो सकते हैं, लेकिन सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए सरकार को शिक्षा के बजट में निवेश करना चाहिए।


उन्होंने रोजगार के अवसरों की आवश्यकता पर भी जोर दिया, यह सुनिश्चित करते हुए कि मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में भी नौकरियों का सृजन हो, ताकि युवा पीढ़ी को रोजगार मिल सके।