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रुपये में गिरावट: 95.86 प्रति डॉलर पर पहुंचा, जानें कारण

रुपये ने गुरुवार को 95.86 प्रति डॉलर का नया निम्न स्तर छू लिया है, जो एशिया की सबसे कमजोर मुद्रा बन गया है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और पश्चिम एशिया संकट इसके गिरने के प्रमुख कारण हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही, तो आम आदमी पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। जानें रुपये की गिरावट के पीछे के कारण और इसके प्रभाव के बारे में।
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रुपये में गिरावट: 95.86 प्रति डॉलर पर पहुंचा, जानें कारण

रुपये की गिरावट का कारण

नई दिल्ली। गुरुवार को रुपये ने शुरुआती कारोबार में 20 पैसे की गिरावट के साथ 95.86 प्रति डॉलर का नया निम्न स्तर छू लिया है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण घरेलू मुद्रा पर दबाव बना हुआ है।


रुपये का एशिया में प्रदर्शन

रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्रा

इस वर्ष रुपये ने एशिया की सबसे कमजोर मुद्रा का दर्जा प्राप्त किया है, जिसमें अब तक 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। महंगे कच्चे तेल, मजबूत अमेरिकी डॉलर और पश्चिम एशिया संकट के कारण यह स्थिति बनी है।


रुपये की गिरावट के कारण

रुपया क्यों कमजोर हो रहा है?

विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये पर दबाव डालने वाले कई प्रमुख कारण हैं। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार बनी हुई हैं, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली हो रही है, और डॉलर इंडेक्स में मजबूती आ रही है। इसके अलावा, मध्य पूर्व और ईरान के बीच बढ़ती चिंताएं भी रुपये को प्रभावित कर रही हैं। भारत अपनी लगभग 90% तेल और 50% गैस जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। यदि ईरान युद्ध लंबा चलता है, तो इसका असर रुपये और महंगाई पर पड़ सकता है।


शेयर बाजार की स्थिति

शेयर बाजार में तेजी, लेकिन चिंता बरकरार

रुपये में कमजोरी के बावजूद, घरेलू शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 424 अंक बढ़कर 75,033.42 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 141 अंक बढ़कर 23,554.50 पर कारोबार कर रहा था। हालांकि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली चिंता का विषय बनी हुई है।


आम आदमी पर प्रभाव

आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर?

रुपये में गिरावट का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। पेट्रोल, डीजल, गैस, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। यदि कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है।