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रूस के राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा: BRICS शिखर सम्मेलन में भागीदारी की संभावना

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे की संभावना को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं। सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी की चर्चा हो रही है। रूस ने भारत के साथ तेल आपूर्ति के मौजूदा समझौतों को जारी रखने का आश्वासन दिया है। उप विदेश मंत्री एंड्रे रुडेंको ने कहा कि पुतिन के दौरे में कोई बड़ी बाधा नहीं है, हालांकि पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। जानें इस दौरे के पीछे की रणनीति और भारत-रूस संबंधों पर इसका प्रभाव।
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रूस के राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा: BRICS शिखर सम्मेलन में भागीदारी की संभावना

पुतिन के भारत दौरे के संकेत


रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत यात्रा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत सामने आए हैं। सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी की संभावना जताई जा रही है। रूस के उप विदेश मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निमंत्रण गंभीरता से लिया जा रहा है। इसके साथ ही, रूस ने भारत के साथ तेल आपूर्ति के मौजूदा समझौतों को बनाए रखने का आश्वासन भी दिया है।


शिखर सम्मेलन में भागीदारी के संकेत

रूस के उप विदेश मंत्री एंड्रे रुडेंको ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों के बावजूद राष्ट्रपति पुतिन के भारत आने में कोई बड़ी रुकावट नहीं है। हालांकि, पश्चिम एशिया की स्थिति पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस भारत की अध्यक्षता में BRICS के भीतर सहमति बनाने के प्रयासों का समर्थन करेगा।


ब्रिक्स में मतभेद की चुनौती

रुडेंको ने स्वीकार किया कि ब्रिक्स समूह में विभिन्न देशों की नीतियों और प्राथमिकताओं के कारण सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण है। इस संगठन में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं, जिनके बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं। फिर भी, सदस्य देश वैश्विक स्तर पर अपने हितों की सुरक्षा के लिए एक साथ काम करने के इच्छुक हैं।


तेल आपूर्ति पर रूस का भरोसा

रूस ने स्पष्ट किया है कि वह भारत समेत अपने साझेदार देशों के साथ किए गए सभी पुराने तेल आपूर्ति अनुबंधों का पालन करेगा। हालांकि, देश ने 1 अप्रैल 2026 से पेट्रोल निर्यात पर रोक लगाने का निर्णय लिया है, जिसका कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव बताया गया है, लेकिन तेल आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी।


भारत-रूस सहयोग और वैश्विक असर

मार्च 2026 में भारत ने रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की, जो नौ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत-रूस सहयोग और मजबूत हो सकता है। रूस ने भी उम्मीद जताई है कि क्षेत्रीय संघर्ष जल्द समाप्त होगा, जिससे सभी देशों को राहत मिलेगी।