लखनऊ में दूषित पानी की समस्या: स्वास्थ्य संकट की ओर बढ़ते कदम
लखनऊ में दूषित पानी का संकट
लखनऊ। हाल के समय में देश के विभिन्न शहरों में दूषित जल के सेवन से हैजा, डायरिया, टाइफाइड, और उल्टी-दस्त जैसी गंभीर बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे कई लोगों की जान भी जा चुकी है। देश के विकास के दावों के बावजूद, स्मार्ट सिटी और राज्य की राजधानियों में भी स्वच्छ जल की कमी एक गंभीर समस्या बन गई है।
लखनऊ की स्थिति पर गौर करें, जहां योगी सरकार के विकास के दावों के विपरीत, दूषित जल की समस्या बढ़ती जा रही है। जलकल और स्वास्थ्य विभाग केवल औपचारिकता निभाते हुए पानी की गुणवत्ता की जांच करते हैं। यह जांच मार्च से अक्टूबर तक प्रतिदिन एक कॉलोनी में की जाती है, लेकिन रिपोर्टें अक्सर धूल फांकती रहती हैं। आम नागरिक को यह नहीं पता होता कि उनके घर में आने वाला पानी कितना सुरक्षित है।
दूषित जल की जांच प्रक्रिया
सरकारी नियमों के अनुसार, सीएमओ ऑफिस की एक टीम जलकल विभाग के प्रतिनिधियों के साथ प्रतिदिन पानी की गुणवत्ता की जांच करती है। एक कॉलोनी से पानी का सैंपल लेकर उसे लैब में भेजा जाता है, लेकिन रिपोर्टें सार्वजनिक नहीं की जातीं। इससे लोगों को पानी की गुणवत्ता के बारे में जानकारी नहीं मिल पाती।
स्वास्थ्य विभाग की नई पहल
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डॉ. विशांत ने बताया कि एक फरवरी से उनकी टीम नियमित रूप से पानी की जांच शुरू करेगी। आमतौर पर संक्रामक रोगों का सीजन मार्च से शुरू होता है, इसलिए उनकी टीम इस दौरान विशेष ध्यान देगी।
दूषित जल के कारण और समाधान
लखनऊ के कई क्षेत्रों में लोग महीनों से गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। जलकल जीएम कुलदीप सिंह ने बताया कि पुरानी पाइप लाइनों में लीकेज और सीवर लाइनों का बिछाया जाना दूषित जल का मुख्य कारण है।
लोगों की समस्याएं और जलकल विभाग का दावा
इंदिरा नगर, खदरा, और आलमबाग जैसे क्षेत्रों में लोग दूषित जल की समस्या से जूझ रहे हैं। जलकल विभाग के अधिकारी नियमित जांच का दावा करते हैं, लेकिन लोगों को यह नहीं बताया जाता कि उनके पानी में क्या कमी है।
निष्कर्ष
लखनऊ में दूषित जल की समस्या गंभीर होती जा रही है, और इसके समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
