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लोकसभा और राज्यसभा ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इम्पीचमेंट प्रस्ताव को किया खारिज

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इम्पीचमेंट प्रस्ताव को खारिज कर दिया। विपक्ष ने उन पर कई आरोप लगाए थे, जिसमें पक्षपाती कार्य और वोटरों को सूची से बाहर करने का आरोप शामिल था। यह प्रस्ताव पहली बार संसद में लाया गया था, जिसमें 193 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे। जानें इस फैसले के पीछे की वजह और विपक्ष की प्रतिक्रिया।
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लोकसभा और राज्यसभा ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इम्पीचमेंट प्रस्ताव को किया खारिज

इम्पीचमेंट प्रस्ताव का खारिज होना

सोमवार को लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इम्पीचमेंट मोशन को अस्वीकार कर दिया। विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार पर देशभर में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और हाल के विधानसभा चुनावों के संचालन को लेकर सवाल उठाए थे।


प्रस्ताव का विवरण

यह नोटिस 12 मार्च 2026 को लोकसभा में 130 और राज्यसभा में 63 सांसदों द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जिसमें कुल 193 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे। यह पहली बार था जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव संसद में लाया गया। नोटिस 10 पन्नों का था और इसमें सात आरोप शामिल थे।


आरोपों की सूची

ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया गया कि वे पक्षपाती तरीके से कार्य कर रहे हैं, वोटरों को बड़े पैमाने पर सूची से बाहर कर रहे हैं, और बिहार तथा पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में SIR प्रक्रिया को गलत तरीके से संचालित कर रहे हैं। इसके अलावा, उन पर साबित बदमाशी और एक विशेष राजनीतिक पार्टी के प्रति पक्षपात का भी आरोप था।


विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि CEC जानबूझकर बीजेपी की मदद के लिए SIR को मनमाने ढंग से चला रहे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन किया है, जबकि राहुल गांधी ने 'वोट चोरी' का अभियान चलाया।


निर्णय का विवरण

लोकसभा सचिवालय की अधिसूचना में कहा गया कि ओम बिरला ने जजेस (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 की धारा 3 के तहत नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसी तरह का निर्णय राज्यसभा चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने भी लिया। दोनों ने कहा कि प्रस्ताव को मंजूर नहीं किया गया है।


विपक्ष की आलोचना

टीएमसी के राज्यसभा सांसद ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'बीजेपी हमारे महान संसद का मजाक उड़ा रही है।' बीजेपी नेताओं ने विपक्ष की इस कोशिश की आलोचना की और कहा कि राजनीतिक दलों को चुनावी मुकाबले पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि चुनाव आयोग को निशाना बनाना चाहिए।


आगे की स्थिति

यह मोशन खारिज हो गया है। यदि इसे आगे बढ़ाना होता, तो संसद में विशेष बहुमत से पास होना आवश्यक था, लेकिन अब यह समाप्त हो चुका है।