वसई-विरार में हितेंद्र ठाकुर की बहुजन विकास आघाड़ी ने भाजपा को हराया
वसई-विरार में राजनीतिक उलटफेर
मुंबई। महाराष्ट्र में जहां भाजपा (BJP) बीएमसी समेत कई महानगरपालिकाओं में जीत की ओर बढ़ रही है, वहीं वसई-विरार (Vasai-Virar) में स्थिति एकदम भिन्न है। यहां हितेंद्र ठाकुर (Hitendra Thakur) के नेतृत्व वाली बहुजन विकास आघाड़ी (BVA) ने भाजपा की सभी योजनाओं को नाकाम करते हुए अपनी स्थिति को मजबूत बनाए रखा है।
जबकि पूरे महाराष्ट्र में भाजपा की लहर चल रही है, वसई-विरार में एक अलग राजनीतिक परिदृश्य देखने को मिला है। यहां भाजपा की रणनीतियां विफल रहीं और बड़े दलों का प्रभाव भी कमज़ोर पड़ा। स्थानीय नेता हितेंद्र ठाकुर की पार्टी BVA ने एक बार फिर से शानदार जीत हासिल की है।
BVA की जीत का जश्न!
वसई-विरार महानगरपालिका की 115 सीटों के लिए मतगणना के नतीजे सभी को चौंका देने वाले रहे हैं। सत्ता के लिए आवश्यक 58 सीटों का आंकड़ा पार करते हुए, हितेंद्र ठाकुर की पार्टी ने 71 सीटों पर जीत दर्ज की। जबकि भाजपा केवल 43 सीटों पर सिमट गई। इसके अलावा, शिवसेना (एकनाथ शिंदे) को एक सीट मिली, जबकि कांग्रेस, उद्धव ठाकरे की शिवसेना और एनसीपी जैसे अन्य दलों का खाता भी नहीं खुला। इस जीत के साथ, BVA ने वसई-विरार महानगरपालिका पर अपनी सत्ता को बनाए रखा है।
हितेंद्र ठाकुर को महाराष्ट्र की राजनीति में, विशेषकर पालघर और वसई-विरार क्षेत्र में एक प्रमुख नेता माना जाता है। उन्होंने 2009 में अपनी पार्टी BVA की स्थापना की थी।
भाजपा की हार का बड़ा झटका
महाराष्ट्र की 20 से अधिक महानगरपालिकाओं में जीत के करीब पहुंची भाजपा के लिए वसई-विरार का परिणाम एक बड़ा झटका है। यहां भाजपा की सभी योजनाएं विफल रहीं और पार्टी केवल 43 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस, एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना का हाल भी बुरा रहा, जो कोई सीट नहीं जीत सकी।
हितेंद्र ठाकुर का राजनीतिक सफर
हितेंद्र ठाकुर (Hitendra Thakur) वसई-विरार और नालासोपारा क्षेत्र में एक मजबूत राजनीतिक चेहरा हैं। उन्होंने 2009 में बहुजन विकास आघाड़ी (BVA) की स्थापना की और वसई विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक रह चुके हैं। उनके बेटे क्षितिज ठाकुर वर्तमान में नालासोपारा से विधायक हैं। स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित राजनीति और क्षेत्रीय पकड़ ही BVA की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है, जिसके कारण राज्य की बड़ी पार्टियां उनके क्षेत्र में प्रभावी नहीं हो पातीं।
